US Navy ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, USS Tripoli संभाल रहा कमान, हो सकता है बड़ा असर
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है. इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिकी युद्धपोत USS Tripoli बड़ी भूमिका निभा रहा है. यह फैसला ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फेल होने के बाद लिया गया है. अब ईरान के समुद्री रास्तों पर अमेरिका की कड़ी नज़र है और कई युद्धपोत वहां तैनात कर दिए गए हैं.
अमेरिका ने क्या कदम उठाए और क्यों
U.S. Central Command (CENTCOM) ने 14 अप्रैल 2026 से इस नाकाबंदी को लागू किया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना को आदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय पानी में मौजूद उन सभी जहाजों को रोका जाए जिन्होंने ईरान को टोल दिया है. इसके अलावा ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री माइन्स को नष्ट करने के निर्देश भी दिए गए हैं. अमेरिका ने यह कदम ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के कारण उठाया है.
- ऑपरेशन में 10,000 से ज़्यादा जवान शामिल हैं.
- एक दर्जन से ज़्यादा युद्धपोत और दर्जनों विमान तैनात किए गए हैं.
- USS Abraham Lincoln और USS Gerald Ford जैसे बड़े जहाज भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं.
ईरान की प्रतिक्रिया और आर्थिक नुकसान
ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इस नाकाबंदी को गैरकानूनी और समुद्री डकैती बताया है. ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उनके समुद्री रास्तों में रुकावट आई तो वे इसका कड़ा जवाब देंगे. ईरान का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी उनके नियंत्रण में है. आर्थिक तौर पर यह ईरान के लिए बड़ी चोट हो सकती है.
| विवरण | अनुमानित प्रभाव |
|---|---|
| ईरान का दैनिक आर्थिक नुकसान | करीब 435 मिलियन डॉलर |
| मुख्य कारण | निर्यात और आयात में रुकावट |
आम जहाजों और व्यापारियों पर क्या असर होगा
CENTCOM ने साफ किया है कि यह नाकाबंदी केवल ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों के लिए है. जो जहाज अन्य देशों के बंदरगाहों की तरफ जा रहे हैं, उन्हें रास्ते में कोई परेशानी नहीं होगी. मरीनर्स को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक ब्रॉडकास्ट का पालन करें और अमेरिकी नौसेना से संपर्क बनाए रखें. पहले 24 घंटों में छह व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी आदेश मानकर वापस लौटने का फैसला किया.




