अरब सागर में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर काफी बढ़ गया है। मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। यह घटना तब हुई जब ईरानी ड्रोन अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln के बेहद करीब आ रहा था। अमेरिकी सेना ने खतरे को देखते हुए इसे अपनी आत्मरक्षा में की गई जरूरी कार्रवाई बताया है।

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F-35 फाइटर जेट से किया गया हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना ईरान के दक्षिणी तट से करीब 500 मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। अमेरिकी पोत की तरफ बढ़ रहे Iranian Shahed-139 ड्रोन को रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना ने कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि अमेरिकी F-35C लाइटनिंग II फाइटर जेट ने उड़ान भरी और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।

यह ड्रोन ठीक उसी तरह का था जैसा MQ-1 प्रीडेटर होता है, जो निगरानी और हमले दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि ड्रोन को कई बार पीछे हटने के संकेत दिए गए थे, लेकिन उसने अपना रास्ता नहीं बदला।

सेना ने बताया आत्मरक्षा में उठाया कदम

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने जानकारी दी कि ड्रोन काफी आक्रामक तरीके से जहाज की ओर बढ़ रहा था। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत और अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए ‘Rules of Engagement’ का पालन करते हुए यह कदम उठाना पड़ा।

वहीं दूसरी ओर, ईरानी मीडिया का कहना है कि उनका ड्रोन केवल एक निगरानी मिशन पर था और नष्ट होने से पहले उसने अपना डेटा भेज दिया था। इसी दिन होर्मुज जलडमरूमध्य में भी एक अमेरिकी टैंकर ‘Stena Imperative’ को लेकर दोनों देशों के बलों के बीच तनातनी देखने को मिली थी, जिसे बाद में अमेरिकी सुरक्षा बलों ने संभाला।