US President Trump का बड़ा बयान, 2-3 हफ्ते में ईरान से सेना हटाने का किया ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान से हट जाएगी। उन्होंने बताया कि ईरान की सैन्य शक्ति काफी हद तक कम हो चुकी है और अब वहां रुकने की जरूरत नहीं है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब खाड़ी देशों में तनाव चरम पर है और समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। खाड़ी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी खबर है।
राष्ट्रपति ट्रंप के बयान और ‘Operation Epic Fury’ की स्थिति
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि अमेरिका का सैन्य अभियान ‘Operation Epic Fury’ अपनी तय समय सीमा से दो हफ्ते आगे चल रहा है। राष्ट्रपति का मानना है कि इस युद्ध का अंत अब करीब है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह Strait of Hormuz के रास्तों को खुला रखने के लिए अमेरिकी संसाधनों को हटाने में जल्दबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने सहयोगी देशों से अपील की है कि वे अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लें और इन समुद्री रास्तों की सुरक्षा में हाथ बटाएं।
खाड़ी क्षेत्र में पिछले 24 घंटों की प्रमुख घटनाएं
भले ही सेना हटाने की बात की जा रही है पर जमीनी हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कई अहम गतिविधियां देखी गई हैं जो सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।
| घटना | विवरण |
|---|---|
| B52 बॉम्बर्स | पेंटागन ने ईरान के ऊपर से उड़ानें शुरू की हैं। |
| टैंकर हमला | दुबई के पास कुवैती तेल टैंकर पर हमला हुआ है। |
| इज़राइल की तैयारी | इज़राइली सेना आने वाले हफ्तों तक ऑपरेशन जारी रखने को तैयार है। |
| Strait of Hormuz | तेल की सप्लाई के लिए यह रास्ता अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। |
| द्विपक्षीय बातचीत | ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से फिलहाल मना किया है। |
प्रवासियों और व्यापार पर पड़ने वाला संभावित असर
खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों प्रवासियों के लिए समुद्री सुरक्षा का मुद्दा सीधा उनकी रोजी-रोटी और तेल की कीमतों से जुड़ा हुआ है। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर अन्य देश Strait of Hormuz के बंद होने से परेशान हैं तो उन्हें खुद वहां जाकर स्थिति संभालनी होगी क्योंकि अमेरिका अब वहां मदद के लिए हमेशा मौजूद नहीं रहेगा। इसके साथ ही अमेरिका में सैन्य ड्राफ्ट की चर्चाओं ने भी वहां रहने वाले परिवारों के बीच थोड़ी चिंता बढ़ाई है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बयान के बाद हलचल तेज हो गई है।




