अमेरिका के एक बड़े नेता ने पाकिस्तान पर भरोसा न करने की बात कहकर सबको चौंका दिया है। सीनेटर Lindsey Graham ने साफ कहा कि वे पाकिस्तान पर विश्वास नहीं करते हैं। यह बयान तब आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति बनाने की कोशिशें चल रही थीं। अब चर्चा है कि अमेरिका इस मामले में किसी और देश की मदद ले सकता है।

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सीनेटर Lindsey Graham ने पाकिस्तान पर शक क्यों किया?

सीनेटर Lindsey Graham ने मंगलवार, 12 मई 2026 को एक सरकारी बैठक में यह बात कही। उन्हें शक है कि पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने हवाई अड्डों पर जगह दी। CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम ईरान को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए उठाया गया था। Graham का कहना है कि अगर ये खबरें सच हैं, तो पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका से हटाकर किसी और विकल्प की तलाश करनी चाहिए।

पाकिस्तान और चीन ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। मंत्रालय ने कहा कि ईरान के विमान सिर्फ शांति वार्ता के दौरान सरकारी काम और डिप्लोमैटिक लोगों की सुविधा के लिए आए थे। पाकिस्तान ने खुद को एक निष्पक्ष और जिम्मेदार मददगार बताया है। दूसरी तरफ, चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने 12 मई को पाकिस्तान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान की कोशिशों की सराहना करता है और उम्मीद करता है कि पाकिस्तान इस बातचीत को आगे बढ़ाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप और ईरान का क्या रुख है?

हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने साथी सीनेटर Graham के उलट पाकिस्तान की तारीफ की है। ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल को बहुत अच्छा बताया। हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें ईरान के मामले में किसी की मदद की जरूरत नहीं है और वे इस बारे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात करेंगे। वहीं ईरान का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन तभी जब उसकी गरिमा और राष्ट्रीय हितों का सम्मान हो। ईरान को लगता है कि अमेरिका दबाव बनाने के लिए यह सब कर रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सीनेटर Lindsey Graham ने पाकिस्तान पर शक क्यों किया?

उन्हें रिपोर्ट मिली थी कि पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने एयरफील्ड पर जगह दी, जिससे वे अमेरिकी हमलों से सुरक्षित रह सकें।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस आरोप पर क्या जवाब दिया?

मंत्रालय ने कहा कि ईरानी विमान केवल शांति वार्ता के दौरान डिप्लोमैटिक कर्मियों और लॉजिस्टिक्स के लिए आए थे, उनका सैन्य उद्देश्यों से कोई लेना-देना नहीं है।