US-Iran War Update: ईरान पर अमेरिका का बड़ा हमला, एआई और सुसाइड ड्रोन का हुआ इस्तेमाल, खाड़ी देशों में अलर्ट जारी
अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ शुरू कर दिया है। इस बड़े सैन्य अभियान में अमेरिकी सेना ने आधुनिक तकनीक और एंथ्रोपिक कंपनी के क्लाउड एआई का उपयोग किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की उनके घर पर ही मौत हो गई है। इस घटना के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में स्थिति काफी नाजुक हो गई है और ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ईरान पर हमले में किन हथियारों और तकनीक का हुआ इस्तेमाल?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस ऑपरेशन में कई ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया है जो युद्ध के तरीके को बदल रहे हैं। इसमें पहली बार ल्यूकस (LUCAS) नाम के सुसाइड ड्रोन का बड़े पैमाने पर प्रयोग हुआ है। ये ड्रोन काफी सस्ते हैं और इन्हें दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने के लिए डिजाइन किया गया है।
| हथियार या तकनीक | खासियत और कीमत |
|---|---|
| बी-2 स्टील्थ बॉम्बर | जमीन के अंदर बने मिसाइल ठिकानों पर हमला करने के लिए |
| ल्यूकस सुसाइड ड्रोन | मात्र 35,000 डॉलर की कीमत वाला घातक ड्रोन |
| क्लाउड एआई (Claude AI) | युद्ध क्षेत्र की जानकारी और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के लिए |
| टोमहॉक मिसाइल | लॉन्ग रेंज से सटीक हमला करने के लिए |
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर?
ईरान ने इस हमले के जवाब में यूएई, कतर, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों की तरफ मिसाइल और ड्रोन छोड़े हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक है क्योंकि युद्ध का दायरा अब पड़ोसी देशों तक फैल रहा है। विमान सेवाओं और समुद्री रास्तों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। समुद्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी ईरान ने निशाना बनाने की कोशिश की है।
व्हाइट हाउस और सेना के बीच एआई को लेकर विवाद
इस हमले के दौरान एंथ्रोपिक कंपनी के क्लाउड एआई का इस्तेमाल चर्चा का विषय बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सुरक्षा कारणों से इस एआई के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी लेकिन सेना ने इसे हटाने से मना कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह एआई सिस्टम सैन्य कामकाज में इतनी गहराई से जुड़ा है कि इसे अचानक बंद करना संभव नहीं था। सेना अब इस सिस्टम को पूरी तरह बदलने के लिए छह महीने का समय मांग रही है।




