US Iran War Update: अमेरिका ने ईरान में उतारे खतरनाक हथियार, ड्रोन्स और F-35 जेट्स से 15000 ठिकानों पर किया हमला
अमेरिका और इज़राइल ईरान के खिलाफ अपने सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक को अंजाम दे रहे हैं। 13 मार्च 2026 तक इस युद्ध में 15,000 से ज्यादा ठिकानों को नष्ट किया जा चुका है। अमेरिका इस जंग में अपने सबसे एडवांस हथियारों और तकनीकों की टेस्टिंग कर रहा है, जिसमें कामिकाजे लुकास ड्रोन और F-35 फाइटर जेट्स शामिल हैं। पेंटागन के अनुसार ईरान की नौसेना और एयर डिफेंस पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं।
ईरान में किन हथियारों का हो रहा है इस्तेमाल?
अमेरिका इस युद्ध में नई तकनीकों का सीधा परीक्षण कर रहा है। इसके लिए कई आधुनिक हथियारों को मैदान में उतारा गया है।
- Lucas Drones: यह सैटेलाइट से चलने वाले ड्रोन हैं। इन्होने ईरान के 95 प्रतिशत ड्रोन पावर को खत्म कर दिया है।
- F-35 Lightning II: यह फाइटर जेट्स USS Tripoli के साथ मिलकर तेहरान के ऊपर सीधे हमले कर रहे हैं।
- B-2 Stealth Bombers: इन विमानों का उपयोग ईरान के हथियारों की फैक्ट्री को तबाह करने के लिए हो रहा है।
- Minuteman III: अमेरिका ने युद्ध के बीच 5 मार्च को इस मिसाइल का सफल टेस्ट किया है।
युद्ध का मौजूदा हालात और नुकसान
13 मार्च अब तक का सबसे भारी हमले वाला दिन रहा है। अमेरिका और इज़राइल हर दिन 1000 से ज्यादा टारगेट पर बम गिरा रहे हैं। तेहरान के फिरदौसी स्क्वायर के पास भारी विस्फोट देखे गए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध में ईरान के हजारों लड़ाके मारे गए हैं और उनका 90 प्रतिशत मिसाइल सिस्टम नष्ट हो गया है।
पश्चिमी इराक में अमेरिका का एक KC-135 विमान क्रैश हो गया, जिसमें 6 क्रू मेंबर्स समेत कुल 13 अमेरिकी सैनिकों की जान गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंच गई है, जिससे वैश्विक मार्केट पर असर पड़ा है।
ईरान और अमेरिका के आधिकारिक बयान
अमेरिकी रक्षा मंत्री (Secretary of War) पीट हेगसेथ ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि ईरान के पास अब कोई वायु सेना या नौसेना नहीं बची है और उनकी सैन्य ताकत टूट चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि यह युद्ध तब खत्म होगा जब उन्हें अंदर से महसूस होगा।
दूसरी तरफ ईरान के IRGC ने Google, Microsoft, Palantir और Nvidia जैसी टेक कंपनियों को अपना सैन्य टारगेट घोषित किया है। ईरान का दावा है कि यह कंपनियां अमेरिकी सेना को AI और सर्विलांस सपोर्ट दे रही हैं।




