दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने पुष्टि की है कि सरकार ईरान के तेल पर लगी पाबंदियों को कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई को स्थिर करना और पेट्रोल-डीजल की महंगाई से आम जनता को राहत देना है।

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ईरान के तेल को लेकर अमेरिका ने क्यों बदली अपनी रणनीति?

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार यह फैसला दुनिया भर में तेल की बढ़ती मांग और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को देखते हुए लिया गया है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण रास्तों से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई थी। अब अमेरिका चाहता है कि दुनिया को तेल की कमी महसूस न हो।

  • सप्लाई में सुधार: अमेरिका अब ईरानी तेल टैंकरों को समुद्र के रास्ते गुजरने की अनुमति दे रहा है।
  • कीमतों पर नियंत्रण: बाजार में अधिक तेल आने से कच्चे तेल के दाम गिरने की उम्मीद है।
  • चीन और भारत पर असर: इन देशों के जहाज भी इस रास्ते का उपयोग कर रहे हैं और अमेरिका ने इस पर सहमति जताई है।
  • रणनीतिक बदलाव: राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन के तहत यह एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है।

ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने क्या जानकारी साझा की?

ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने बताया कि अमेरिका उन ईरानी तेल टैंकरों पर नरमी बरत रहा है जो पहले से ही खुले समुद्र में हैं। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल अमेरिका का ध्यान इस बात पर है कि दुनिया के पास पर्याप्त तेल भंडार रहे। इससे पहले रूस के तेल शिपमेंट पर भी इसी तरह की अस्थायी राहत दी गई थी ताकि वैश्विक बाजार में संतुलन बना रहे।

तारीख लिया गया महत्वपूर्ण फैसला
13 मार्च 2026 रूस के तेल शिपमेंट पर अस्थायी रूप से पाबंदी हटाई गई
17 मार्च 2026 ईरानी टैंकरों को Strait of Hormuz से गुजरने की हरी झंडी मिली
19 मार्च 2026 जरूरत पड़ने पर सुरक्षित भंडार (Strategic Reserves) से तेल निकालने की पुष्टि

इस पूरे घटनाक्रम से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट को टालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर यह प्रक्रिया जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में भारत और खाड़ी देशों समेत दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है।