US Treasury का बड़ा फैसला: तेल की कमी दूर करने के लिए उठाया कदम, ईरान पर हटा सकते हैं पाबंदी
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने साफ कर दिया है कि अमेरिका तेल के वायदा बाजार में कोई सीधा दखल नहीं देगा। ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच तेल की सप्लाई पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए वाशिंगटन अब फिजिकल क्रूड यानी असली तेल की उपलब्धता बढ़ाने पर पूरा जोर दे रहा है। सरकार का मुख्य मकसद दुनिया भर में तेल की कीमतों को काबू में रखना और बाजार में स्थिरता लाना है।
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ईरान के तेल पर क्यों हट सकती है पाबंदी?
अमेरिका करीब 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल पर से पाबंदी हटाने पर विचार कर रहा है जो फिलहाल समुद्र में जहाजों पर रखा हुआ है। यह मात्रा पूरी दुनिया के लिए लगभग 10 से 14 दिनों की सप्लाई के बराबर मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल तेल की कीमतें कम होंगी, बल्कि चीन जैसे देशों को मिलने वाला एकतरफा फायदा भी रुकेगा। यह तेल बाजार में आने से सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए क्या हैं नए नियम?
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने कई सुरक्षात्मक कदमों का ऐलान किया है। ईरान द्वारा तेल और गैस सुविधाओं पर हमलों के बाद समुद्री रास्तों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
| संस्था का नाम | मुख्य जिम्मेदारी |
|---|---|
| US Navy | Strait of Hormuz में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना |
| US Treasury | फिजिकल तेल की उपलब्धता पर फोकस करना |
| Finance Corp | तेल शिपमेंट के लिए इंश्योरेंस और गारंटी प्रदान करना |
कुवैत की Mina Al-Ahmadi रिफाइनरी पर हुए ड्रोन हमले और ईरान के कड़े रुख के बाद दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका अब अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि तेल का बहाव न रुके। जानकारों का कहना है कि अगर कीमतें इसी तरह ऊपर रहीं तो साल 2026 में वैश्विक व्यापार पर इसका बहुत बुरा असर पड़ सकता है।




