अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की लंबी शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। इस विफलता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz) की जहाजों की नाकाबंदी करने का ऐलान किया है। इस फैसले से पूरी दुनिया और खास तौर पर खाड़ी देशों में हलचल मच गई है क्योंकि यह समुद्री रास्ता व्यापार के लिए बहुत अहम है।

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बातचीत क्यों विफल हुई और अमेरिका का क्या कहना है?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि कोई समझौता नहीं हो पाया क्योंकि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। अमेरिका की मुख्य मांग यह थी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की एक सकारात्मक प्रतिबद्धता दे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा छोड़नी होगी। वहीं ईरानी राज्य मीडिया का कहना है कि अमेरिका की अनुचित मांगों की वजह से यह बातचीत नाकाम हुई है।

रूस की मध्यस्थता और अन्य देशों का रुख

तनाव बढ़ने के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की है। पुतिन ने मध्य पूर्व में शांति लाने के लिए बीच-बचाव करने की पेशकश की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों देशों से संघर्ष विराम का पालन करने की अपील की है। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने भी अमेरिका और ईरान से बातचीत जारी रखने और कुछ रियायतें देने का आग्रह किया है।

विवाद से जुड़ी मुख्य घटनाक्रम और तारीखें

तारीख घटना
जून 2025 अमेरिका और इज़राइल के हमलों से ईरान का संवर्धन कार्यक्रम प्रभावित हुआ
28 फरवरी 2026 ईरानी ठिकानों पर हवाई हमलों के साथ ‘ईरान युद्ध’ की शुरुआत हुई
12 अप्रैल 2026 इस्लामाबाद में 21 घंटे की वार्ता विफल हुई और होर्मुज की नाकाबंदी शुरू हुई