अमेरिका ने इसराइल को दी बड़ी जानकारी, ईरान के साथ बातचीत अब खत्म, ट्रंप ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम.
वाशिंगटन ने आधिकारिक तौर पर तेल अवीव को सूचित किया है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत अब पूरी तरह से बंद हो गई है। 4 अप्रैल 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत का अब कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूटने की मुख्य वजह क्या है?
ईरान ने वाशिंगटन की ओर से रखे गए युद्धविराम के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें उसे मंजूर नहीं हैं और उसने इस्लामाबाद में होने वाली प्रस्तावित बैठक में हिस्सा लेने से भी मना कर दिया है। ईरान की मुख्य मांग है कि अमेरिका पहले उसे हर्जाना दे और मध्य पूर्व में मौजूद अपने सैन्य ठिकानों को खाली करे। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को मात्र 48 घंटे का समय दिया है कि वह या तो समझौता करे या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को खुला रखे, वरना गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
पिछले 24 घंटों में हुई बड़ी सैन्य घटनाएं और नुकसान
डिप्लोमैटिक कोशिशें फेल होने के बाद अब अमेरिका और इसराइल मिलकर ईरान के भीतर रणनीतिक ठिकानों पर हमला करने की योजना बना रहे हैं। पिछले कुछ घंटों में युद्ध की स्थिति काफी गंभीर हुई है जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
| घटना का प्रकार | मुख्य विवरण |
|---|---|
| इजरायली हमला | इसराइली सेना ने ईरान की उन पेट्रोकेमिकल फैक्ट्रियों पर बमबारी की जहां मिसाइल का सामान बनता है। |
| परमाणु प्लांट पर हमला | ईरान के बुशहर परमाणु प्लांट के पास हवाई हमला हुआ, रूस ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। |
| विमान गिराने का दावा | ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के F-15 और A-10 लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। |
| बॉर्डर बंद | ईरान में हवाई हमलों के बाद इराक ने अपना शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग बंद कर दिया है। |
| समुद्री तनाव | ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर ड्रोन से हमला किया जिससे वहां आग लग गई। |
इस बीच पाकिस्तान मध्यस्थता के जरिए शांति की कोशिशें कर रहा है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि शांति तभी होगी जब उन पर थोपे गए युद्ध को हमेशा के लिए खत्म किया जाएगा। तुर्की और मिस्र भी इस गतिरोध को सुलझाने के लिए इस्तांबुल और दोहा जैसे शहरों में नई बातचीत शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों की नजरें इस पूरे मामले पर बनी हुई हैं क्योंकि सैन्य टकराव का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है।




