सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। मसूद के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह तनाव अमेरिकी वैश्विक प्रभुत्व के अंत की शुरुआत हो सकता है। उन्होंने ईरान की रणनीतिक ताकत और उसके समुद्री रास्तों पर नियंत्रण का हवाला देते हुए बताया कि इस युद्ध का असर पूरी दुनिया के व्यापार और तेल की कीमतों पर बहुत बुरा पड़ेगा।
ℹ️: ईरान की बड़ी चेतावनी: पावर प्लांट पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र का तेल और एनर्जी ढांचा होगा तबाह।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का भारत पर क्या असर होगा?
पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष की वजह से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बताया कि समुद्र के रास्ते होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से Strait of Hormuz के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई में भारी गिरावट आई है। इस स्थिति का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है क्योंकि ईंधन और गैस की कीमतों में उछाल आने की संभावना बनी हुई है।
- तेल सप्लाई में कमी: Strait of Hormuz से रोजाना होने वाली 22 मिलियन बैरल की तेल सप्लाई घटकर अब मात्र 0.5 मिलियन बैरल रह गई है।
- LPG की कमी: भारत के कई हिस्सों में LPG की किल्लत की खबरें आ रही हैं।
- 23,000 भारतीय फंसे: Forward Seamen’s Union के अनुसार युद्ध क्षेत्र में लगभग 23,000 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं जिनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है।
इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की ताजा स्थिति क्या है?
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार यह संघर्ष अब अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। शनिवार को ईरान की मिसाइलों ने इजराइल के अराद और डिमोना शहरों को निशाना बनाया जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही ईरान में पिछले 500 घंटों से इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है जिससे वहां की जमीनी जानकारी मिलने में मुश्किल हो रही है। भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी तेल और महंगाई को लेकर डर का माहौल बना हुआ है।
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| प्रमुख प्रभावित क्षेत्र | Strait of Hormuz, इजराइल (Arad, Dimona) |
| फंसे हुए भारतीय | लगभग 23,000 नागरिक |
| तेल सप्लाई गिरावट | 22 मिलियन से 0.5 मिलियन बैरल तक |
| इंटरनेट स्थिति | ईरान में 4 हफ्ते से इंटरनेट बंद |
