पश्चिम एशिया युद्ध के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर, कृषि मंत्रालय ने कहा- नहीं होगी खाद और बीज की कमी
भारत के कृषि मंत्रालय ने बुधवार को साफ तौर पर आश्वासन दिया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव या युद्ध का देश के कृषि क्षेत्र और किसानों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय ने बताया कि आने वाले खरीफ सीजन के लिए सभी जरूरी इनपुट मटेरियल और खाद-बीज का पूरा भंडार मौजूद है। यूनियन एग्रीकल्चर मिनिस्टर Shivraj Singh Chouhan ने खुद इस स्थिति की समीक्षा की है और अधिकारियों को खाद की सप्लाई बिना रुके जारी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।
👉: Gaza News: अल-शिफा अस्पताल से निकाले गए बच्चे 2 साल बाद माता-पिता से मिले, मिस्र में चल रहा था इलाज।
खरीफ सीजन के लिए बीज और खाद की उपलब्धता
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल खरीफ सीजन के लिए बीजों की उपलब्धता जरूरत से कहीं ज्यादा है। धान, सोयाबीन, मूंगफली और दालों जैसी मुख्य फसलों के लिए सरकार के पास सरप्लस स्टॉक है। वहीं उर्वरक मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि उनके पास यूरिया और DAP जैसी जरूरी खादों का भंडार पिछले साल के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।
| सामग्री | उपलब्धता / स्टॉक | स्थिति |
|---|---|---|
| बीज (Seeds) | 185.74 लाख क्विंटल | जरूरत 166.46 लाख क्विंटल से अधिक |
| यूरिया (Urea) | 62 लाख टन | पर्याप्त स्टॉक |
| DAP खाद | 25 लाख टन | पर्याप्त स्टॉक |
| NPK खाद | 56 लाख टन | पर्याप्त स्टॉक |
सरकार द्वारा सप्लाई बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम
- Special Cell: कृषि मंत्रालय ने एक स्पेशल सेल का गठन किया है जो 24 घंटे कृषि क्षेत्र और खाद की उपलब्धता पर नजर रखेगा।
- Natural Gas Supply: खाद बनाने वाली कंपनियों को कम से कम 70 प्रतिशत नेचुरल गैस की सप्लाई पक्की की गई है ताकि उत्पादन में कोई रुकावट न आए।
- Farmer ID: खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ‘Farmer IDs’ बनाने के काम में तेजी लाई गई है।
- LPG Coordination: मक्का के बीजों को सुखाने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ मिलकर LPG की व्यवस्था सुलझा ली गई है।
- Shipping Safety: शिपिंग मंत्रालय ने पुष्टि की है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक और जहाज सुरक्षित हैं।
हालांकि कुछ जानकारों ने कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और समुद्री रास्तों में दिक्कतों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन सरकार ने भरोसा दिया है कि वह हर स्थिति पर नजर रख रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी खाद और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की है ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो।




