White House Statement: ईरान में सेना उतारने का विकल्प खुला, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को लेकर नई जानकारी आई सामने
व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि ईरान में अमेरिकी जमीनी सेना यानी ‘बू़ट्स-ऑन-ग्राउंड’ भेजने के विकल्प को खारिज नहीं किया गया है। प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने बताया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ तब तक चलेगा जब तक इसके सभी निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस सैन्य अभियान के अंत का फैसला करेंगे। वर्तमान में यह ऑपरेशन अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
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ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के 4 मुख्य उद्देश्य क्या हैं
अमेरिकी सरकार ने इस सैन्य कार्रवाई के लिए चार प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है। इन लक्ष्यों के पूरा होने के बाद ही ऑपरेशन को समाप्त किया जाएगा।
- ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और मिसाइल बनाने वाले बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना।
- ईरानी शासन की नौसैनिक ताकतों को पूरी तरह खत्म करना ताकि वे समुद्र में चुनौती न दे सकें।
- ईरान समर्थित आतंकवादी समूहों की अमेरिकी सेना और क्षेत्र को अस्थिर करने की क्षमता को रोकना।
- यह गारंटी सुनिश्चित करना कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त नहीं कर सकेगा।
ईरान में अब तक की सैन्य कार्रवाई और नुकसान का विवरण
अमेरिकी सैन्य आंकड़ों के अनुसार पिछले 11 दिनों में ईरान की सैन्य शक्ति को काफी नुकसान पहुंचा है। व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि ईरानी नौसेना अब युद्ध लड़ने में सक्षम नहीं बची है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में उसका कोई जहाज सक्रिय नहीं है।
| विवरण | ताजा आंकड़े / स्थिति |
|---|---|
| ईरानी मिसाइल हमलों में कमी | 90 प्रतिशत की गिरावट |
| ईरानी ड्रोन हमलों में कमी | 85 प्रतिशत की गिरावट |
| घायल अमेरिकी सैनिक | 140 (108 वापस ड्यूटी पर आए) |
| गंभीर रूप से घायल सैनिक | 8 |
| ईरानी नौसेना की स्थिति | पूरी तरह अक्षम (Combat Ineffective) |
खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर प्रभाव
इस युद्ध का असर खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों जैसे UAE, सऊदी अरब और कतर पर भी देखा जा रहा है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नौसेना ने अभी तक फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करना यानी सुरक्षा घेरा देना शुरू नहीं किया है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि बी-2 बमवर्षकों ने ईरान के अंदर गहराई में स्थित मिसाइल केंद्रों को निशाना बनाया है। सीनेटर Richard Blumenthal ने भी जमीनी सेना भेजने की संभावना पर चिंता जताई है जिससे क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम और बढ़ सकते हैं।




