यमन सरकार ने ईरान की नीतियों को ठुकराया, शांति के लिए खतरा बताया
यमन की सरकार ने 28 मार्च, 2026 को ईरान की नीतियों को साफ़ तौर पर खारिज कर दिया है. सरकार का कहना है कि ईरान यमन की ज़मीन का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और शांति के लिए खतरा पैदा करने वाले मंचों के तौर पर कर रहा है. यह बयान ‘अख़बार सऊदी’ (@SaudiNews50) के एक ट्वीट के ज़रिए दुनिया के सामने आया. यमन ने इस बात पर चिंता जताई है कि ईरान अपनी साज़िशों को अंजाम देने के लिए उनके इलाके का गलत इस्तेमाल कर रहा है.
ईरान पर यमन सरकार के गंभीर आरोप
यमन सरकार ने पहले भी ईरान को चेतावनी दी थी. 22 मार्च, 2026 को यमन ने कहा था कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ाने की ईरान की धमकियाँ खतरनाक हैं. यमन के सूचना मंत्री, मामार अल-इरियानी ने तब बताया था कि ईरान इस मोर्चे के लिए सीधी योजनाएँ बना रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है. यमन की सरकार ने हाउथी लड़ाकों को भी चेतावनी दी थी कि वे ईरान के कहने पर यमन की ज़मीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों को निशाना बनाने के लिए न करें. 10 मार्च, 2026 को यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद ने कहा था कि वे अपनी ज़मीन को क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री आवाजाही के लिए खतरा नहीं बनने देंगे.
क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हाल के घटनाक्रम
यमन सरकार के बयान से कुछ समय पहले, 28 मार्च, 2026 को यमन के हाउथी लड़ाकों ने इज़राइल पर हमला करने की पुष्टि की थी. यह इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे बड़े संघर्ष का हिस्सा था. इसी दिन, इज़राइल की सेना ने भी ईरान के “शासन के ठिकानों” पर हमले किए. सऊदी अरब ने भी बताया कि उन्होंने अपनी राजधानी रियाद को निशाना बनाने वाली एक मिसाइल को रोका था. ये घटनाएँ दिखाती हैं कि यमन सरकार की चिंताएँ कितनी गंभीर हैं. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वे ईरान के ऐसे उल्लंघनों के खिलाफ मजबूत कदम उठाएँ ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे.




