यमन में हालात बिगड़ते जा रहे हैं और इसके लिए वहां की सरकार सीधे तौर पर ईरान को ज़िम्मेदार मान रही है। सरकार का कहना है कि ईरान मिलिशिया को लगातार मदद दे रहा है जिससे न केवल यमन बल्कि पूरे इलाके की शांति खतरे में है। इसका असर अब दुनिया भर के व्यापार और समुद्री रास्तों पर भी दिखने लगा है।

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हाल ही में 4 जुलाई 2026 को यमन की Presidential Leadership Council ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के नियमों को तोड़कर एक नागरिक विमान सना भेजा। इस कदम को यमन की संप्रभुता का उल्लंघन माना गया है। इसी बीच 3 जुलाई को ईरान की मिलिट्री ने चेतावनी दी कि Strait of Hormuz में बिना मंजूरी रास्ता बदलने वाले जहाजों को सख्त जवाब दिया जाएगा। साथ ही, ईरान से जुड़े हूती मिलिशिया ने Bab al-Mandab Strait पर फिर से हमले की धमकी दी है जिससे ग्लोबल शिपिंग पर बड़ा असर पड़ सकता है।

इस तनाव को कम करने के लिए 1 जुलाई को अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में तकनीकी बातचीत हुई। इस मीटिंग का मकसद समुद्री रास्तों को सुरक्षित करना और युद्धविराम पर सहमति बनाना था। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समुद्री रास्ते पर उसके कंट्रोल को मान्यता मिले और वह जहाजों से फीस वसूल सके।

जून के महीने में यमन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के एक साझा बयान का स्वागत किया। यमन सरकार ने साफ कहा कि ईरान की सैन्य और आर्थिक मदद की वजह से हूती मिलिशिया अब एक बड़े खतरे में बदल चुका है। रक्षा मंत्री Lieutenant General Taher Al-Aqili ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी ताकि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखकर अंतरराष्ट्रीय शांति बनाई जा सके।

यमन सरकार ने 7 जून को बहरीन और कुवैत पर हुए ईरानी हमलों की भी निंदा की और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक बताया। वहीं दूसरी तरफ, सना में बैठे हूती समर्थित विदेश मंत्रालय ने 11 जून को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया तो इससे पूरे इलाके में बड़ा युद्ध छिड़ सकता है और ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।