यमन में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर उनकी हवाई सीमा का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं दूसरी तरफ, सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता ने इन बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे यमनी लोगों के खिलाफ किए गए अपराधों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश बताया है।

ℹ: Palestine Envoy: भारत से मांगी मदद, ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम करने के लिए भारत बने मध्यस्थ

हूतियों के आरोप और धमकी

3 जुलाई 2026 को हूती सैन्य प्रवक्ता जनरल Yahya Sari ने दावा किया कि सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने यमन की हवाई सीमा में घुसपैठ की। उन्होंने कहा कि सऊदी जेट्स ने सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक ईरानी विमान को उतरने से रोकने की कोशिश की। हूतियों के मुताबिक, इस विमान में 200 से ज्यादा बीमार, घायल यमनी नागरिक और तेहरान से लौट रहा एक प्रतिनिधिमंडल सवार था।

जनरल Sari ने सऊदी अरब को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसे हमले या सीमा उल्लंघन जारी रहे, तो हूती बल सऊदी हवाई अड्डों और जमीन व समुद्र में मौजूद अहम ठिकानों को निशाना बनाएंगे। हूतियों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने एयर डिफेंस मिसाइल दागकर सऊदी जेट्स को वापस खदेड़ दिया।

गठबंधन का जवाब

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए Joint Forces Command के प्रवक्ता ने कहा कि हूती समूह के ये बयान केवल अपनी जिम्मेदारियों से बचने का एक तरीका हैं। गठबंधन का मानना है कि हूती विद्रोहियों ने यमनी जनता के साथ जो गलतियां और उल्लंघन किए हैं, उनसे दुनिया का ध्यान हटाने के लिए वे सऊदी अरब के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। प्रवक्ता ने साफ कहा कि हूती समूह अपनी आंतरिक समस्याओं को बाहरी विवादों के जरिए सुलझाने या एक्सपोर्ट करने की कोशिश कर रहा है।

मानवीय सहायता और अन्य उल्लंघन

इस विवाद के बीच हूतियों पर मानवीय सहायता के दुरुपयोग के आरोप भी लगे हैं। बताया गया है कि हूती शासन ने SCMCHA नाम का एक संगठन बनाया है, जो मदद के सामान को जरूरतमंदों तक पहुँचाने के बजाय अपने फायदे के लिए मोड़ देता है।

  • सितंबर 2024 में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई देशों ने संयुक्त बयान जारी कर हूतियों द्वारा हिरासत में लिए गए संयुक्त राष्ट्र और NGO कर्मचारियों की रिहाई की मांग की थी।
  • अप्रैल 2020 में गठबंधन ने रिपोर्ट किया था कि हूतियों ने 24 घंटे के भीतर युद्धविराम का 114 बार उल्लंघन किया।
  • जून 2026 में हूतियों ने अपनी सैन्य तैयारी तेज कर दी और क्षेत्रीय संघर्षों का हवाला देते हुए सऊदी अरब पर वेतन भुगतान का दबाव बनाया।