जब हम सऊदी अरब का नाम लेते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले ‘तेल’ (Oil) और रेगिस्तान आता है, है न? लेकिन अब अपनी सोच बदल लीजिये, क्योंकि सऊदी अरब अब ज़मीन छोड़कर सीधे अंतरिक्ष (Space) में अपनी बादशाहत कायम करने जा रहा है!
11 जनवरी 2026 को एक बहुत बड़ा ऐलान हुआ है। सऊदी अरब और जापान (Japan)—जो टेक्नोलॉजी का उस्ताद माना जाता है—ने एक ऐतिहासिक हाथ मिलाया है।
आइये, आसान भाषा में समझते हैं कि ‘विज़न 2030’ के तहत यह जोड़ी अंतरिक्ष में क्या कमाल करने वाली है।
🚀 अब सऊदी में बनेंगे सैटेलाइट्स!
इस समझौते का सबसे बड़ा मकसद है सऊदी अरब को “ग्लोबल सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग हब” बनाना। यानी अब उपग्रह (Satellites) सिर्फ़ अमेरिका या रूस में नहीं, बल्कि सऊदी की फैक्ट्रियों में भी बनेंगे।
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पार्टनर्स: सऊदी स्पेस कमीशन और जापान की मशहूर कंपनियां (जैसे ispace) मिलकर काम करेंगी।
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टेक्नोलॉजी: जापान अपनी हाई-टेक जानकारी (Technology Transfer) सऊदी को देगा और सऊदी इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश लगाएगा।

📶 इंटरनेट की रफ़्तार होगी तूफानी
इस डील का सीधा फायदा आम लोगों को भी मिलेगा।
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HTS Ka-band: यह एक खास तरह की टेक्नोलॉजी है जिससे हाई-स्पीड ब्रॉडकास्टिंग और इंटरनेट मिलेगा।
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D2D (डायरेक्ट-टू-डिवाइस): 2026 में ही Direct-to-Device सर्विस शुरू करने का प्लान है। इसका मतलब है कि आपका फ़ोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेगा—टावर की ज़रूरत ही नहीं!
🌕 चाँद पर खुदाई? (Moon Mining)
यह बात आपको किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी लग सकती है, लेकिन यह सच है! जापान की ‘ispace’ और सऊदी की ‘Magna Petra’ के बीच एक और समझौता (MoU) हुआ है। इनका प्लान चाँद पर ‘हीलियम-3’ (Helium-3) की माइनिंग करने का है। हीलियम-3 को भविष्य का ‘क्लीन एनर्जी’ सोर्स माना जाता है। यानी सऊदी अब तेल के बाद चाँद की ऊर्जा पर नज़र गड़ाए है।
💼 इसका क्या असर होगा?
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नौकरियां (Jobs): सऊदी के युवाओं के लिए स्पेस साइंस और इंजीनियरिंग में हज़ारों नई नौकरियां पैदा होंगी।
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कनेक्टिविटी: पूरे मिडिल ईस्ट (MENA) और अफ्रीका में इंटरनेट और संचार सेवाएं बेहतर होंगी।
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बड़ा लक्ष्य: सऊदी का सपना है कि वह स्पेस मार्केट में 70% हिस्सेदारी (क्षेत्रीय स्तर पर) हासिल करे।
सऊदी अरब ने 2000 से 2019 के बीच 16 सैटेलाइट छोड़े थे, लेकिन अब वे सिर्फ़ ‘लॉन्च’ नहीं करना चाहते, बल्कि खुद ‘बनाना’ चाहते हैं। जापान जैसा दोस्त मिलने के बाद, लगता है कि सऊदी का ‘विज़न 2030’ अब रॉकेट की रफ़्तार पकड़ेगा!




