त्योहारों में 3 गुना महंगा हवाई टिकट बेचने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और सामान ले जाने की सीमा घटाने को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। कोर्ट ने कहा कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान एयरलाइंस यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रही हैं, जिस पर लगाम लगनी चाहिए। यह मामला उन लाखों लोगों के लिए अहम है जो काम के सिलसिले में दूसरे शहरों या खाड़ी देशों में रहते हैं और त्योहारों पर घर आते हैं।
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क्यों नाराज है सुप्रीम कोर्ट और क्या है शिकायत?
जनहित याचिका में बताया गया है कि एयरलाइंस ने मुफ्त चेक-इन सामान की सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दी है। अगर किसी यात्री का सामान इससे ज्यादा होता है, तो उन्हें लगभग 660 रुपये प्रति किलो तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि त्योहारों के समय, जैसे कुंभ या छुट्टियों में, हवाई किराया सामान्य से तीन गुना तक बढ़ जाता है। बेंच ने प्रयागराज और जोधपुर जैसे शहरों का उदाहरण देते हुए इसे यात्रियों का शोषण माना है।
सरकार ने क्या जवाब दिया और आगे क्या होगा?
केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और उच्चतम स्तर पर इसकी समीक्षा की जा रही है। सॉलिसिटर जनरल ने इसके लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक भी बुलाई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च, 2026 को होगी। याचिका में मांग की गई है कि हवाई सेवा को भी रेलवे की तरह आवश्यक सेवा माना जाए और किराए की ऊपरी सीमा (Fare Cap) तय की जाए ताकि यात्रियों की जेब पर बोझ न पड़े।




