भारत ने अपनी सुरक्षा और विदेश नीति को मजबूत करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। UAE के साथ ऐतिहासिक रक्षा समझौता करने के ठीक बाद, भारत ने सऊदी अरब के साथ भी एक हाई-लेवल सुरक्षा बैठक की है। 28 जनवरी 2026 को रियाद में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने और पुराने रिश्तों को नया रूप देने का फैसला किया है।
सऊदी अरब के साथ बैठक में क्या खास हुआ?
रियाद में हुई यह ‘India-Saudi Arabia Security Working Group’ की तीसरी महत्वपूर्ण बैठक थी। इस बैठक में भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय के विनोद बहाड़े और सऊदी अरब की तरफ से गृह मंत्रालय के अहमद अल-ईसा ने हिस्सा लिया। दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग की पूरी समीक्षा की है।
- आतंकवाद पर वार: दोनों पक्षों ने कट्टरपंथ और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने पर जोर दिया है।
- तकनीक का सही इस्तेमाल: बैठक में तय हुआ कि AI और साइबर तकनीक का इस्तेमाल आतंकियों को नहीं करने दिया जाएगा।
- हमलों की निंदा: दोनों देशों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम और नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए हमलों की कड़ी निंदा की।
UAE के साथ हुई थी ऐतिहासिक डिफेंस डील
सऊदी अरब से बातचीत करने से पहले, 19 जनवरी 2026 को भारत ने UAE के साथ एक बड़ा समझौता किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने एक ‘Letter of Intent’ साइन किया था। इसका मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाना है।
| समझौता | विवरण |
|---|---|
| गैस डील | ADNOC और HPCL के बीच 3 अरब डॉलर का LNG समझौता। |
| व्यापार लक्ष्य | 2032 तक व्यापार को 200 अरब डॉलर तक ले जाना। |
| शांति कानून | परमाणु ऊर्जा सहयोग के लिए SHANTI कानून लाया गया। |
भारत की नई रणनीति और दुनिया की नजर
जानकार मानते हैं कि भारत, सऊदी अरब और UAE दोनों के साथ संतुलन बनाकर चल रहा है। हाल ही में अमेरिका के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी दिल्ली में इन रिश्तों पर चर्चा की है। विदेश मंत्रालय ने आज साफ किया है कि इन समझौतों का मतलब यह कतई नहीं है कि भारत यमन या किसी अन्य क्षेत्रीय युद्ध में शामिल होगा। भारत अपनी ‘Strategic Autonomy’ यानी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखेगा।




