Budget 2026: अब नारियल और काजू की खेती से होगी मोटी कमाई, सरकार ने लॉन्च की नई योजना
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करते हुए किसानों के लिए एक बड़ी राहत दी है। उन्होंने नारियल, काजू और कोको की खेती करने वाले किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए दो नई योजनाओं का ऐलान किया है। सरकार का मकसद इन फसलों के पुराने पेड़ों को बदलकर नए पौधे लगाना और भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजार में मजबूत बनाना है।
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नारियल संवर्धन योजना में किसानों को क्या मिलेगा?
वित्त मंत्री ने नारियल की खेती में सुधार के लिए ‘नारियल संवर्धन योजना’ का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत मुख्य नारियल उत्पादक राज्यों में उन पेड़ों को हटाने पर जोर दिया जाएगा जो अब पुराने हो चुके हैं और फल नहीं दे रहे हैं।
सरकार की योजना है कि इन बेकार पेड़ों की जगह नई और उन्नत किस्म के पौधे लगाए जाएं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की उत्पादकता भी बेहतर होगी। इस योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी Coconut Development Board को दी गई है। यह कदम उन लाखों परिवारों के लिए मददगार साबित होगा जो अपनी रोजी-रोटी के लिए नारियल की खेती पर निर्भर हैं।
काजू और कोको को ग्लोबल ब्रांड बनाने की तैयारी
काजू और कोको की खेती के लिए भी सरकार ने एक विशेष कार्यक्रम की घोषणा की है। इसका मुख्य लक्ष्य भारत को कच्चे काजू और कोको की प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार चाहती है कि हम बाहर से सामान मंगाने के बजाय अपने देश में ही उत्पादन और प्रोसेसिंग बढ़ाएं।
वित्त मंत्री ने कहा है कि 2030 तक भारतीय काजू और कोको को दुनिया भर में एक ‘प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड’ के रूप में स्थापित किया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल पाएगा। इस काम की देखरेख Directorate of Cashew and Cocoa Development द्वारा की जाएगी।
योजना के नियम और सब्सिडी की जानकारी
फिलहाल इन दोनों योजनाओं का ऐलान बजट भाषण के दौरान किया गया है। अभी तक यह साफ नहीं है कि किसानों को कितनी सब्सिडी मिलेगी या आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग जल्द ही इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेंगे।
सरकार का यह कदम खेती को आधुनिक बनाने और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। जैसे ही इसके आधिकारिक नियम आएंगे, किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग से संपर्क कर सकेंगे।





