Saudi Arabia ने Germany के साथ मिलाया हाथ, ऊर्जा के क्षेत्र में हुई बड़ी डील, 2030 का रखा लक्ष्य
सऊदी अरब के रियाद स्थित अल-यदामा पैलेस में बुधवार को एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर पैलेस में एक आधिकारिक रिसेप्शन सेरेमनी भी रखी गई थी। दोनों नेताओं ने बैठकर दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने और व्यापार बढ़ाने पर लंबी बातचीत की। यह मुलाकात जर्मनी के चांसलर के तीन दिवसीय खाड़ी दौरे का हिस्सा थी, जिसके बाद वे कतर और यूएई भी जाएंगे।
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क्या है Green Ammonia Corridor समझौता?
इस मुलाकात का सबसे बड़ा नतीजा ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई साझेदारी के रूप में सामने आया है। दोनों देशों ने मिलकर एक ‘Green Ammonia Corridor’ बनाने का फैसला किया है। इसके तहत सऊदी अरब अपनी जमीन पर तैयार होने वाली रिन्यूएबल एनर्जी को जर्मनी भेजेगा।
सऊदी अरब में सूरज की रोशनी और हवा से बिजली बनाना काफी सस्ता पड़ता है, जिसका फायदा अब जर्मनी को भी मिलेगा। तय किया गया है कि साल 2030 तक सऊदी अरब से जर्मनी के बंदरगाहों तक ग्रीन अमोनिया का निर्यात शुरू कर दिया जाएगा। यह कदम जर्मनी को प्रदूषण कम करने और क्लाइमेट न्यूट्रलिटी हासिल करने में मदद करेगा।
10 बड़े समझौतों पर लगी मुहर
इस दौरे पर सिर्फ बातें ही नहीं हुईं, बल्कि कागजों पर भी काम हुआ। सऊदी और जर्मन कंपनियों के बीच कुल 10 समझौतों (Letters of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में नई ऊर्जा तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- सऊदी कंपनी ACWA Power और जर्मन कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ेगा।
- सऊदी की KAUST यूनिवर्सिटी और जर्मन रिसर्च संस्थाओं ने भी हाथ मिलाया है ताकि नई तकनीक लैब से निकलकर बाजार तक आ सके।
- यह पूरी कवायद सऊदी अरब के ‘विजन 2030’ का हिस्सा है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को सिर्फ कच्चे तेल के भरोसे न रखा जाए।




