गलकोटियास यूनिवर्सिटी का AI रोबोट पर दावा झूठा निकला, भारत मंडपम से स्टॉल हटाने का आदेश
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में गलकोटियास यूनिवर्सिटी को अपने स्टॉल से हटने का आदेश दिया गया है। यूनिवर्सिटी पर एक रोबोट को खुद का आविष्कार बताकर पेश करने का आरोप लगा था, जबकि वह एक चीनी कंपनी का खरीदा हुआ उत्पाद था। इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। GulfHindi.com के संस्थापक लव सिंह ने भी पहले यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों से रोबोट की तकनीक पर सवाल किए थे, जिसका सही जवाब नहीं मिला था।
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विवाद कैसे शुरू हुआ?
फरवरी 17, 2026 को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में गलकोटियास यूनिवर्सिटी ने एक रोबोटिक कुत्ता प्रदर्शित किया था। यूनिवर्सिटी की संचार प्रमुख प्रोफेसर नेहा सिंह ने एक टीवी इंटरव्यू में इसे “ओरियन” नाम दिया और दावा किया कि इसे गलकोटियास यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने विकसित किया है। हालांकि, जल्द ही टेक एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया यूजर्स ने पहचान लिया कि यह रोबोट चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का व्यावसायिक रूप से उपलब्ध “यूनिट्री गो2” मॉडल था, जिसकी कीमत लगभग 1,600 से 2,800 डॉलर है।
यूनिवर्सिटी का बचाव और सरकारी कार्रवाई
जब रोबोट की तकनीकी विशिष्टताओं पर सवाल उठाए गए, तो यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने सीधे जवाब देने के बजाय एआई में 350 करोड़ रुपये के निवेश, एक समर्पित ब्लॉक और यूएई सहित कई देशों से छात्रों के आने की बात कही। विवाद बढ़ने पर, 18 फरवरी, 2026 को सरकारी अधिकारियों और समिट के आयोजकों ने गलकोटियास यूनिवर्सिटी को तुरंत अपना स्टॉल खाली करने का आदेश दिया। बिजली काट दी गई और स्टॉल के आसपास बैरिकेड लगा दिए गए। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार ऐसे प्रदर्शनों को बर्दाश्त नहीं करेगी जो मूल रचना के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाते हैं।
यूनिवर्सिटी की माफी और छात्रों पर असर
शुरुआत में इसे “प्रचार अभियान” बताने के बाद, गलकोटियास यूनिवर्सिटी ने 18 फरवरी को एक औपचारिक माफी जारी की। उन्होंने “गलत सूचना” के लिए “कम जानकारी रखने वाले” प्रतिनिधि (नेहा सिंह) को जिम्मेदार ठहराया, जिन्हें प्रेस से बात करने का अधिकार नहीं था। यूनिवर्सिटी ने अब कहा है कि उनका इरादा कभी यह दावा करना नहीं था कि उन्होंने रोबोट बनाया है, बल्कि इसे छात्रों को एआई प्रोग्रामिंग सिखाने के लिए एक “गतिशील कक्षा” के रूप में उपयोग किया जा रहा था।




