पश्चिम एशिया युद्ध से भारत में सप्लाई चेन पर मंडराया खतरा, जयशंकर ने दी चेतावनी, 67 हज़ार भारतीय लौटे वतन
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि आम भारतीय उपभोक्ताओं का हित उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि युद्ध के कारण सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ रहा है जिससे महंगाई और कच्चे तेल के दाम बढ़ने का खतरा है। सरकार खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर लगातार नजर बनाए हुए है और अब तक 67,000 भारतीय सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं।
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युद्ध से सप्लाई चेन और आम आदमी पर असर
पश्चिम एशिया के हालातों का सीधा असर भारत के व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों का आकलन कर रही है। व्यापार और लॉजिस्टिक से जुड़े कुछ अहम आंकड़े इस प्रकार हैं:
- कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
- करीब 45,000 भारतीय कंटेनर अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं।
- युद्ध के खतरे और रूट बदलने के कारण एक्सपोर्ट का खर्च पांच गुना तक बढ़ गया है।
सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम जनता पर कम से कम पड़े।
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए उठाए गए कदम
गल्फ देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। इसके अलावा कई हजार छात्र और कर्मचारी ईरान में भी मौजूद हैं। भारतीय दूतावास लगातार वहां रहने वाले लोगों की मदद कर रहा है।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों को सुरक्षित निकालने और बिजनेस यात्रियों को आर्मेनिया के रास्ते वापस भेजने में मदद की है। सरकार ने जनवरी और फरवरी में एडवाइजरी भी जारी की थी जिसमें लोगों को सावधानी बरतने को कहा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में क्यों रुकने दिया?
राज्यसभा में विदेश मंत्री ने ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan को कोच्चि पोर्ट पर रुकने की अनुमति देने के फैसले के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह फैसला पूरी तरह से मानवीय आधार और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत लिया गया था।
जहाज में तकनीकी खराबी आने के बाद 1 मार्च को अनुमति दी गई थी और 4 मार्च को जहाज मरम्मत के लिए कोच्चि पहुंचा। उसी दिन एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Dena श्रीलंका के तट के पास डूब गया था। भारत का स्पष्ट मानना है कि इस युद्ध का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है।





