Trump on Iranian Oil: ईरान का तेल जब्त करने पर बोले डोनाल्ड ट्रंप, सऊदी और UAE में हमलों के बाद बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल भंडार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि फिलहाल ईरान का तेल जब्त करने के बारे में बात करना थोड़ा जल्दी है, लेकिन वह इस विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को दस दिन हो चुके हैं। खाड़ी क्षेत्र में तेल ठिकानों पर हुए हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
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खाड़ी क्षेत्र में तेल सप्लाई और कीमतों का क्या हाल है?
युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों का आना-जाना पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे दुनिया भर की तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। सऊदी अरामको और कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने अपने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है क्योंकि निर्यात के रास्ते बंद होने से उनके स्टोरेज भर चुके हैं। बाजार के ताजा आंकड़ों को इस टेबल में देखा जा सकता है:
| तेल का प्रकार | अधिकतम कीमत (डॉलर) | ताजा स्थिति |
|---|---|---|
| Brent Crude | 119.50 | 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर |
| WTI Crude | 119.48 | भारी उतार-चढ़ाव जारी |
| Strait of Hormuz | बंद | 20% वैश्विक सप्लाई रुकी |
सऊदी और UAE के तेल ठिकानों पर हमले और सुरक्षा की स्थिति
ईरान ने सऊदी अरब के Shaybah तेल क्षेत्र और UAE के Fujairah इंडस्ट्रियल ज़ोन को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया है। हालांकि सऊदी एयर डिफेंस ने कई हमलों को नाकाम कर दिया, लेकिन इससे निवेशकों में डर का माहौल है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने मांग की है कि युद्ध का खर्च निकालने के लिए ईरान की तेल संपत्तियों को जब्त किया जाना चाहिए।
प्रवासियों और भारतीय कामगारों पर क्या असर होगा?
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है। तेल सप्लाई रुकने से न केवल ईंधन बल्कि रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। अमेरिका अब बाजार को राहत देने के लिए रूस के तेल पर से कुछ पाबंदियां हटाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी गई है ताकि भारत में ऊर्जा का संकट पैदा न हो। अगर तनाव 30 दिनों से ज्यादा चला तो वैश्विक मंदी आने का खतरा बना हुआ है।




