ईरान का EU प्रमुख को करारा जवाब, कहा- बातचीत नहीं सिर्फ दुश्मनों को देंगे मुंहतोड़ जवाब
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने यूरोपीय संघ (EU) की प्रमुख Ursula von der Leyen के एक हालिया बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। Ursula ने अपने भाषण में कहा था कि ईरान के लोग अपनी आज़ादी और भविष्य तय करने का हक रखते हैं। इसके जवाब में ईरान ने कूटनीतिक बातचीत और युद्धविराम की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि जब तक हमले जारी रहेंगे, शांति की कोई बात नहीं होगी।
ईरान ने EU के बयान पर क्या जवाब दिया?
प्रवक्ता Baghaei ने EU प्रमुख के बयान को इस समय के लिए बिल्कुल बेमतलब बताया है। उन्होंने साफ कहा कि दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने और अपनी रक्षा के अलावा किसी भी दूसरी बात का कोई मतलब नहीं है। ईरान का मानना है कि यह उनके लिए कोई शौक की लड़ाई नहीं है बल्कि एक मजबूरी की जंग है जिसे उन पर थोपा गया है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जब तक सैन्य टकराव जारी है, युद्धविराम या किसी भी तरह की मध्यस्थता की बातें बिल्कुल प्रासंगिक नहीं हैं। ईरान का पूरा फोकस अभी अपनी संप्रभुता को बचाने पर है और वह हमलावर देशों के साथ किसी तरह की बातचीत नहीं करेगा।
Ursula von der Leyen ने क्या कहा था?
ब्रुसेल्स में 9 मार्च को EU राजदूतों के सम्मेलन में बोलते हुए Ursula ने कहा था कि ईरान की जनता अपनी आज़ादी और सम्मान की हकदार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नेतृत्व के लिए आंसू बहाने की कोई जरूरत नहीं है। उनके अनुसार ईरान की सरकार अपने ही लोगों को दबा रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में Mojtaba Khamenei को नया Supreme Leader नियुक्त किया गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने पश्चिमी देशों की इस बयानबाजी को ईरान के तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्ज़ा करने की एक चाल भी बताया है।
पड़ोसी देशों पर हुए हमले के दावों से किया इनकार
हाल ही में तुर्की, अज़रबैजान और साइप्रस जैसे देशों में हमले और मिसाइल मिलने की खबरें सामने आई थीं। NATO अधिकारियों ने भी तुर्की के हवाई क्षेत्र में एक मिसाइल को रोकने की बात कही थी। ईरान के प्रवक्ता ने इन सभी दावों को पूरी तरह से झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि ये हमले एक साजिश का हिस्सा हैं ताकि पड़ोसी देशों को इस संघर्ष में घसीटा जा सके। ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करते हुए अब साफ कर दिया है कि वह अपनी रक्षा के लिए हमलावर देशों की किसी भी सुविधा को निशाना बनाने का अधिकार रखता है।





