Oman Govt Update: ओमान सरकार का बड़ा ऐलान, देश के सभी आर्थिक क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित और चालू
ओमान के स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स और फ्री जोन्स अथॉरिटी (OPAZ) के चेयरमैन महामहिम कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने साफ किया है कि क्षेत्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद ओमान के सभी आर्थिक क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित हैं और वहां काम सुचारू रूप से चल रहा है। निवेशकों और व्यापारिक समुदाय के साथ एक वर्चुअल मीटिंग में यह स्पष्ट किया गया कि ओमान में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains), यातायात और ऊर्जा की सप्लाई में कोई बाधा नहीं है।
निवेशकों के लिए क्या है खास अपडेट?
चेयरमैन ने जानकारी दी कि देश के सभी स्पेशल इकोनॉमिक जोन, फ्री जोन और इंडस्ट्रियल सिटीज में सामान्य तरीके से काम हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए जमीन, समुद्र और हवा के रास्ते कमर्शियल मूवमेंट बिना किसी रुकावट के जारी है। इसके साथ ही ओमान और भारत के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) को मंजूरी देने के लिए रॉयल डिक्री संख्या 30/2026 भी जारी की गई है। इस नए फैसले से ओमान के आर्थिक क्षेत्रों में भारतीय निवेश और बढ़ने की उम्मीद है। व्यापार को आसान बनाने के लिए सरकार सिंगल-विंडो सिस्टम के जरिए काम कर रही है।
ओमान में बढ़ रहा है निवेश का ग्राफ
साल 2025 के अंत तक ओमान के इन क्षेत्रों में कुल निवेश 22.4 बिलियन ओमानी रियाल को पार कर गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 6.8 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं के कारण दुनिया भर की कंपनियां यहां अपना पैसा लगा रही हैं।
- कुल निवेश: 22.4 बिलियन ओमानी रियाल (लगभग 58.2 बिलियन डॉलर) से अधिक
- नया निवेश: केवल 2025 में 1.4 बिलियन ओमानी रियाल का नया निवेश आया
- ओमान के जोन्स: OPAZ वर्तमान में 23 स्पेशल इकोनॉमिक जोन और इंडस्ट्रियल सिटीज की देखरेख कर रहा है
- नए प्रोजेक्ट्स: अल मुदैबी, अल सुवैक, थुमरीट और मधा में 4 नई इंडस्ट्रियल सिटी बन रही हैं
डीपी वर्ल्ड के साथ नए प्रोजेक्ट पर काम
सरकार अल रावादा स्पेशल इकोनॉमिक जोन के विकास के लिए प्रसिद्ध ग्लोबल कंपनी डीपी वर्ल्ड (DP World) के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके पहले चरण में 14 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का विकास किया जा रहा है, जिसे जरूरत पड़ने पर 24 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट से प्रवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे और खाड़ी देशों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक नया रास्ता मिलेगा।





