Qatar Government Order: कतर और ओमान ने किया ऐलान, हमले के बीच नहीं करेंगे मध्यस्थता, 6000 कामगारों की यात्रा पर लगी रोक
11 मार्च 2026 को कतर और ओमान ने एक बड़ा आधिकारिक बयान जारी किया. कतर के विदेश राज्य मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अल-खुलैफी ने स्पष्ट किया कि जब तक उन पर हमले हो रहे हैं, वे किसी भी तरह की मध्यस्थता या शांति वार्ता नहीं करा सकते. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, कतर और ओमान दोनों को हाल ही में सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ा है. इस तनाव को देखते हुए कतर में हाई अलर्ट जारी किया गया है, जिसका सीधा असर गल्फ देशों में काम करने वाले प्रवासियों और नए वर्कर की यात्रा पर पड़ रहा है.
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कतर और ओमान ने क्यों लिया यह फैसला?
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. माजिद अल अंसारी ने ओमान पर हुए हमले को एक खतरनाक कदम बताया. ओमान के दुक्म पोर्ट पर 1 मार्च को ड्रोन हमले हुए थे और अब कतर के ऊपर भी हवाई हमले की कोशिश हुई है. कतर के एयर डिफेंस सिस्टम ने 11 मार्च की सुबह दोहा के आसमान में कुछ ड्रोन को नष्ट किया. अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ है. ओमान और कतर दोनों ने यह साफ कर दिया कि जब मध्यस्थ देशों को ही निशाना बनाया जाएगा, तो बातचीत का कोई रास्ता नहीं बचता. इसी वजह से कतर ने अपने यहां सुरक्षा खतरे का स्तर हाई कर दिया है.
कामगारों और आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
इस सुरक्षा संकट और तनाव के कारण गल्फ देशों में जाने वाले भारतीय और अन्य कामगारों पर सीधा असर पड़ा है. आधिकारिक घोषणा के अनुसार, 21 मार्च 2026 तक कामगारों की यात्रा रोक दी गई है. इस फैसले के कारण करीब 6,000 वर्कर अभी कतर और आसपास के इलाकों में नहीं जा सकेंगे. बताया जा रहा है कि इन कामगारों को कंस्ट्रक्शन सेक्टर में लगभग 1 लाख रुपये महीने की नौकरी मिलने वाली थी.
- यात्रा पर रोक: 21 मार्च 2026 तक सुरक्षा कारणों से क्रॉस-बॉर्डर लेबर यात्रा पर आधिकारिक रोक लगा दी गई है.
- शिपिंग और सप्लाई पर असर: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक कंटेनर शिप पर हमले की खबर है, जिससे ग्लोबल सप्लाई और समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है.
- पब्लिक सेफ्टी अलर्ट: दोहा में रहने वाले सभी नागरिकों और प्रवासियों को घर के अंदर रहने और खिड़कियों से दूर सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए हैं.




