Strait of Hormuz: भारतीय जहाजों को नहीं मिला कोई जनरल सेफ पैसेज, ईरान ने कहा बिना इजाजत एंट्री पर होगी कार्रवाई
ईरान और भारत के बीच राजनयिक बातचीत के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय टैंकरों को बिना शर्त रास्ता देने की खबरों को ईरान ने खारिज कर दिया है। पहले यह रिपोर्ट आई थी कि भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा। हालांकि ईरान के सरकारी मीडिया और सैन्य सूत्रों ने साफ कर दिया है कि किसी भी देश को विशेष छूट या ग्रीन कॉरिडोर नहीं दिया गया है।
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ईरान के नए नियम और सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या हैं?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नेवल फोर्स कमांडर अलीरेज़ा तंगसिरी ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को ईरान से पहले अनुमति लेनी होगी। ईरान की सैन्य कमान Khatam Al-Anbiya ने भी दोहराया है कि बिना पूर्व मंजूरी के किसी भी जहाज को रास्ता नहीं दिया जाएगा। वर्तमान नियमों के तहत निम्नलिखित बातें जरूरी हैं:
- सभी जहाजों को ट्रांजिट के लिए ईरान से पहले अप्रूवल लेना होगा
- बिना क्लियरेंस के waterway में घुसने वाले जहाज को निशाना बनाया जा सकता है
- अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय संघ के देशों से जुड़े जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा
- भारतीय जहाजों को केवल केस-टू-केस आधार पर ही मंजूरी दी जा रही है
भारतीय तेल आपूर्ति और जहाजों पर इसका क्या असर होगा?
भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से आयात करता है। सामान्य छूट न मिलने की वजह से भारतीय जहाजों के लिए जोखिम बना हुआ है। पिछले 48 घंटों में इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के बीमा प्रीमियम में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। जहाजों की सुरक्षा को लेकर मरीन ट्रैकिंग डेटा इस प्रकार है:
| जहाज का नाम | वर्तमान स्थिति | सुरक्षा अपडेट |
|---|---|---|
| MT Pushpak | ट्रांजिट में | केस-टू-केस मंजूरी मिली |
| MT Parimal | ट्रांजिट में | केस-टू-केस मंजूरी मिली |
| Shenlong Suezmax | मुंबई बंदरगाह पहुंचा | AIS बंद करके सुरक्षित निकला |
भारतीय शिपिंग महानिदेशालय ने पहले ही नाविकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। ईरान का कहना है कि होर्मुज में असुरक्षा का मुख्य कारण अमेरिका और इजरायल की गतिविधियां हैं। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा को लेकर यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है क्योंकि जहाजों को अब ईरान के कड़े नियमों का पालन करना पड़ रहा है।





