Kuwait Attack: कुवैत ने मार गिराए दुश्मन के ड्रोन, ब्रिटेन के रक्षा सलाहकार के साथ मिलकर बनाया नया प्लान
कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा ने मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के लिए ब्रिटेन के रक्षा सलाहकार के साथ एक अहम बैठक की है। यह बैठक खाड़ी क्षेत्र में हाल ही में हुए ईरानी हमलों और ड्रोन स्ट्राइक के बाद बुलाई गई। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई खतरनाक ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया है जो तेल और एनर्जी मार्केट को निशाना बनाने आए थे।
कुवैत में ड्रोन हमले का क्या हुआ असर?
हाल ही में कुवैत के कई महत्वपूर्ण इलाकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए गए। कुवैत इलेक्ट्रिसिटी मिनिस्ट्री के अनुसार ड्रोन के मलबे गिरने से 6 पावर ट्रांसमिशन लाइन ठप हो गई। हालांकि विभाग ने साफ किया है कि पानी और बिजली की सप्लाई पूरी तरह कंट्रोल में है। इन हमलों में Kuwait International Airport के टर्मिनल 1, फ्यूल स्टोरेज यूनिट और पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी के हेडक्वार्टर को भी नुकसान पहुंचा है। एयरपोर्ट पर मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।
कुवैत में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए खास निर्देश जारी किए गए हैं। रक्षा मंत्रालय ने लोगों से किसी भी संदिग्ध वस्तु या मलबे के पास नहीं जाने की सलाह दी है। अगर किसी को ऐसा कुछ दिखता है तो तुरंत इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल करने को कहा गया है। सुरक्षा के लिए कई इलाकों में सायरन भी बजाए गए ताकि लोग अलर्ट रहें।
सुरक्षा के लिए कुवैत और ब्रिटेन का नया कदम
कुवैत और ब्रिटेन दोनों ने मिलकर सुरक्षा कड़ी करने का फैसला लिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संसद में बताया कि उनके Typhoon और F-35 जेट्स लगातार क्षेत्र में हमलों को रोक रहे हैं। इसके अलावा एयर डिफेंस को मजबूत करने के लिए HMS Dragon और हेलिकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं। कुवैत ने इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव और सुरक्षा परिषद को लेटर भेजा है। कुवैत का कहना है कि यह उनकी संप्रभुता का उल्लंघन है और वे अपनी रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं।
कुवैत आर्म्ड फोर्स के प्रवक्ता कर्नल सऊद अल-अतवान ने बताया कि सेना पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव में अब तक चार सैन्य और सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है। कुवैत और ब्रिटेन दोनों ही देशों ने साफ किया है कि उनकी सैन्य कार्रवाई UN चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत अपनी आत्मरक्षा के लिए है।





