गल्फ देशों ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, ओमान पोर्ट पर हमले के बाद जरूरी सामानों की सप्लाई सुरक्षित करने पर हुआ फैसला
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की इंटरनल ट्रेड कमिटी ने 12 मार्च 2026 को एक इमरजेंसी मीटिंग की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों में सप्लाई चेन की सुरक्षा को मजबूत करना है। ओमान के सलालाह पोर्ट पर हुए ड्रोन हमले और मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालयों ने हिस्सा लिया और सप्लाई को बिना रुके जारी रखने पर चर्चा की।
खाने-पीने के सामान और मार्केट को लेकर क्या हुआ फैसला?
इस समय गल्फ देशों में रहने वाले लोगों और वहां काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के मन में कई सवाल हैं। इसे दूर करने के लिए सरकारों ने कुछ जरूरी कदम उठाए हैं:
- सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्रालय ने मार्केट में 24 घंटे निगरानी शुरू कर दी है ताकि कोई दुकानदार सामान के दाम न बढ़ा सके।
- कुवैत ने अपने घरेलू बाजार को स्थिर रखने के लिए सभी तरह के खाद्य पदार्थों के निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
- सऊदी अरब और बहरीन के अधिकारियों ने साफ किया है कि उनके पास खाने-पीने और अनाज का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और हाल ही में बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदा गया है।
- लोगों और प्रवासियों से अपील की गई है कि वे डरकर जरूरत से ज्यादा सामान स्टॉक न करें, क्योंकि अभी भी पूरी सप्लाई चेन अच्छी तरह से काम कर रही है।
कस्टम क्लीयरेंस और सुरक्षा के लिए नया सिस्टम लागू
गल्फ देशों में सामान की आवाजाही को आसान बनाने के लिए GCC कस्टम्स यूनियन ने 11 मार्च को एक नया नियम पास किया है। इसके तहत कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा ताकि बंदरगाहों पर किसी भी तरह का जाम न लगे और सामान जल्दी बाजार तक पहुंचे। दुबई के जेबेल अली पोर्ट (DP World) पर काम सामान्य चल रहा है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने वाले जहाजों की संख्या जरूर कम हुई है।
GCC के महासचिव जसीम अल-बुदैवी ने कहा है कि सभी गल्फ देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी है और समुद्री रास्तों की हिफाजत करना बहुत जरूरी है। लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए गल्फ देशों के सूचना मंत्री एक नया मीडिया सिस्टम बना रहे हैं जिससे जनता को सही समय पर अपडेट मिलता रहे। इसके अलावा, ब्रिटेन की विदेश मंत्री भी तेल और व्यापार की सप्लाई को सुरक्षित रखने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सऊदी अरब पहुंची हैं।





