Trump का बड़ा बयान, ईरान के खार्ग द्वीप पर तेल ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के खार्ग (Khark) द्वीप पर मौजूद तेल ढांचे को निशाना बनाने का फैसला ले सकता है। 16 मार्च 2026 को दिए गए इस बयान के बाद खाड़ी देशों में तनाव की स्थिति बन गई है। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर समुद्री रास्ते में इसी तरह बाधा डाली जाती रही, तो अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठाने पर विचार करेगा।
खार्ग द्वीप (Khark Island) क्यों खास है और अब तक क्या हुआ
खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ से ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल दुनिया भर में भेजा जाता है। फिलहाल इस द्वीप पर मौजूद तेल के पाइपलाइन और टैंक सुरक्षित हैं। इससे पहले 13 से 14 मार्च 2026 के बीच अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने इस द्वीप पर मौजूद मिसाइल बोट और ड्रोन जैसे कई सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की थी। अमेरिका की योजना ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह से रोक देने की है। ट्रंप ने यह भी ऐलान किया है कि जो देश ईरान से तेल या पेट्रोकेमिकल खरीदेगा, उस पर अमेरिका सख्त प्रतिबंध लगाएगा।
ट्रंप ने हमले की चेतावनी क्यों दी है
इस नई चेतावनी का सीधा संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों को रोके जाने से है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने पहले इंसानियत के नाते ऊर्जा और तेल ठिकानों को हमले से बचा लिया था, लेकिन अगर जहाजों की आवाजाही को नुकसान पहुंचाया गया तो वह अपने फैसले पर दोबारा विचार करेंगे। समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना रहा है। इस गठबंधन में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से युद्धपोत भेजकर मदद करने को कहा गया है ताकि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके।
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार होर्मुज रास्ते का बंद होना वैश्विक तेल सप्लाई में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट बन गया है। इस बीच ईरान की सेना ने धमकी दी है कि अगर उनके तेल ठिकानों पर हमला हुआ, तो वे अमेरिका का साथ देने वाली क्षेत्रीय तेल कंपनियों को बर्बाद कर देंगे। इस टकराव का सीधा असर खाड़ी देशों (Gulf) में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे वहां का आर्थिक माहौल और रोजगार प्रभावित हो सकता है। जेपी मॉर्गन के विशेषज्ञों ने भी माना है कि खार्ग द्वीप पर सीधे हमले से पूरे इलाके में एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।



