Trump का बड़ा बयान: ईरान कर रहा Strait of Hormuz का हथियार की तरह इस्तेमाल, कच्चे तेल के दाम पहुंचे 105 डॉलर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ईरान वैश्विक समुद्री व्यापार को रोकने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। 16 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद के कारण समुद्र में 1000 से अधिक जहाज फंसे हुए हैं, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
क्या है ईरान की मौजूदा रणनीति और सैन्य स्थिति
ट्रंप के मुताबिक ईरान की वायु सेना और नौसेना की ताकत अब खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद ईरान इस रास्ते पर अपना दबाव बनाने के लिए सस्ते ड्रोन और कम दूरी की मिसाइलों का उपयोग कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह समुद्री रास्ता बंद नहीं किया गया है, बल्कि यह उनकी सेना के कड़े नियंत्रण में है। ईरान ने फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत या युद्धविराम से इनकार कर दिया है।
इस बीच ईरान ने अमेरिकी संपत्तियों को पनाह देने के विरोध में UAE के फुजैरा पोर्ट और दुबई एयरपोर्ट पर भी ड्रोन हमले किए हैं। इस घटना से खाड़ी देशों में काम करने वाले और यात्रा करने वाले आम प्रवासियों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं।
क्रूड ऑयल पर असर और अमेरिका की अन्य देशों से मांग
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है जहां से 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती है। रास्ता ब्लॉक होने की वजह से 1000 से ज्यादा ऑयल टैंकर और कार्गो जहाज बाहर फंसे हुए हैं। इसके कारण कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
इस संकट से निपटने के लिए अमेरिका ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और UK सहित 7 देशों से मदद मांगी है। ट्रंप ने इन देशों से अपने युद्धपोत भेजने को कहा है ताकि समुद्री रास्ते को सुरक्षित किया जा सके।
विभिन्न देशों की प्रतिक्रिया इस प्रकार है:
- फ्रांस: अमेरिका के इस गठबंधन में अपने सैन्य जहाज भेजने से साफ इनकार कर दिया है।
- UK: ब्रिटेन ने नाटो मिशन की मांग को ठुकरा कर केवल रक्षात्मक समर्थन देने की बात कही है।
- ईरान: उसने चेतावनी दी है कि यह रास्ता अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बंद है और वे हर जहाज की जांच करेंगे।




