Saudi Arabia New Order: सऊदी अरब ने 5 ईरानी राजनयिकों को निकाला बाहर, 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का फरमान
सऊदी अरब ने ईरान के पांच राजनयिकों को देश से बाहर जाने का कड़ा आदेश दिया है। इसमें मिलिट्री अताशे, सहायक अताशे और दूतावास के तीन अन्य कर्मचारी शामिल हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन अधिकारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित करते हुए उन्हें देश छोड़ने के लिए केवल 24 घंटे का समय दिया है। यह फैसला सऊदी अरब की सैन्य साइटों और तेल रिफाइनरी पर हुए हालिया ड्रोन हमलों के बाद लिया गया है।
सऊदी अरब ने क्यों लिया यह सख्त फैसला?
सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला लगातार हो रहे ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सीधा जवाब है। इन हमलों में सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया था। 21 मार्च 2026 को ही सऊदी सशस्त्र बलों ने सुबह के समय मात्र 5 घंटों में 51 ड्रोन मार गिराए थे। ये हमले ज्यादातर पूर्वी प्रांत में हुए थे, जहाँ सऊदी अरब के महत्वपूर्ण तेल भंडार और रिफाइनरी स्थित हैं।
हमलों और कार्रवाई से जुड़ी मुख्य जानकारी
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पिछले कुछ हफ्तों में हुए हमलों का डेटा साझा किया है। हमलों की संख्या में अचानक आई तेजी के बाद खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है।
- ड्रोन हमले: 28 फरवरी से अब तक कम से कम 575 ईरानी ड्रोन हमलों को नाकाम किया गया है।
- मिसाइलें: इसी अवधि के दौरान 42 बैलिस्टिक मिसाइलें और 7 क्रूज मिसाइलें भी इंटरसेप्ट की गई हैं।
- अन्य देशों पर असर: कुवैत, UAE और बहरीन ने भी अपने क्षेत्रों में ईरानी ड्रोन और मिसाइल खतरों की सूचना दी है।
- बीजिंग समझौता: सऊदी अरब का कहना है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय समझौतों और बीजिंग समझौते का खुला उल्लंघन हैं।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर असर
सऊदी अरब और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ सकता है। तेल बुनियादी ढांचे पर हमलों से ईंधन की कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, सऊदी अरब की एयर डिफेंस प्रणाली इन हमलों को रोकने में काफी सफल रही है, जिससे अभी तक बड़े नुकसान की खबर नहीं है। सऊदी क्राउन प्रिंस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा तेज कर दी है।





