UN ने ईरान के हमलों की निंदा की, खाड़ी देशों और जॉर्डन के पक्ष में आया बड़ा फैसला
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने खाड़ी देशों और जॉर्डन पर ईरान के सैन्य हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। जेनेवा में 25 मार्च 2026 को हुए एक बड़े फैसले में परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है। कुवैत के राजदूत Nasir Al-Hayen ने बताया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन हमलों के खिलाफ एकजुटता को जाहिर करता है। इस प्रस्ताव के जरिए मांग की गई है कि ईरान इन हमलों को तुरंत बंद करे और जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई करे।
ईरान के हमलों से खाड़ी देशों में क्या नुकसान हुआ?
UAE के प्रतिनिधि Jamal Jama Al Musharakh ने परिषद को जानकारी दी कि उनके देश पर पिछले 26 दिनों में 2,000 से ज्यादा मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया गया है। इन हमलों ने सीधे तौर पर हवाई अड्डों, पानी के प्लांट और आम जनता के घरों को निशाना बनाया है। जॉर्डन के अधिकारियों ने भी बताया कि उन्होंने अपनी रक्षा में 240 से ज्यादा मिसाइलों को नष्ट किया है, जिसमें कई आम लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब ने साफ तौर पर कहा है कि ईरान की इस हरकत के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाना जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव की मुख्य बातें क्या हैं?
इस प्रस्ताव को सऊदी अरब, UAE, कुवैत और जॉर्डन समेत 100 से ज्यादा देशों ने मिलकर पेश किया था। इसमें साफ कहा गया है कि किसी भी देश की सीमा का उल्लंघन करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। नीचे दी गई तालिका में इस मामले से जुड़े मुख्य आंकड़े दिए गए हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| हमलों की शुरुआत तारीख | 28 फरवरी 2026 |
| प्रस्ताव पास होने का दिन | 25 मार्च 2026 | UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, ओमान और कतर |
| UAE पर दागी गई मिसाइलें | 2,000 से ज्यादा |
| जॉर्डन में हुए नागरिक घायल | 24 लोग |
| प्रस्ताव की मुख्य मांग | हमले तुरंत रुकें और मुआवजा मिले |
आम जनता और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर सुरक्षा के लिहाज से राहत देने वाली है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा ईरान की निंदा किए जाने से क्षेत्र में शांति की उम्मीद बढ़ी है। इन हमलों की वजह से हवाई यात्रा और समुद्री व्यापार (Strait of Hormuz) पर भी खतरा मंडरा रहा था, जिससे जरूरी सामानों की सप्लाई और हवाई टिकटों के दामों पर असर पड़ सकता था। संयुक्त राष्ट्र ने प्रभावित देशों को अपनी रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार दिया है।




