G7 देशों की फ्रांस में बड़ी बैठक, ईरान युद्ध और Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा पर हुई चर्चा
फ्रांस के Abbaye des Vaux-de-Cernay में 26 और 27 मार्च 2026 को G7 देशों के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से ईरान के साथ चल रहे युद्ध और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर चर्चा की गई। बैठक में अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई बड़े देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावटों पर चिंता जताई।
👉: ईरान के इस्फ़हान में स्टील फैक्ट्री पर हमला, एक व्यक्ति की मौत और भारी नुकसान की खबर।
G7 की इस बैठक में किन मुख्य मुद्दों पर बात हुई?
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio और ब्रिटेन की Yvette Cooper ने इस बैठक में प्रमुखता से अपनी बात रखी। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष के लिए अपने साथी देशों से समर्थन की मांग की है। बैठक के बाद जारी साझा बयान में कहा गया कि Strait of Hormuz में जहाजों का रास्ता सुरक्षित और टोल-फ्री रखना बहुत जरूरी है। जापान के विदेश मंत्री ने भी कहा कि कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए जहाजों का रास्ता साफ होना चाहिए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाया जा सके।
खाड़ी देशों और आम जनता पर इस युद्ध का क्या असर पड़ेगा?
युद्ध की वजह से खाड़ी क्षेत्र की तेल और गैस उत्पादन क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। फ्रांस के वित्त मंत्री Roland Lescure ने जानकारी दी कि क्षेत्र में तेल साफ करने की लगभग 30 से 40 प्रतिशत क्षमता को नुकसान हुआ है। इसके अलावा गैस उत्पादन का 17 प्रतिशत हिस्सा भी प्रभावित हुआ है जिसे दोबारा शुरू करने में कई साल लग सकते हैं।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| बैठक की तारीख | 26-27 मार्च, 2026 |
| स्थान | फ्रांस (Abbaye des Vaux-de-Cernay) |
| अमेरिकी प्रतिनिधि | Marco Rubio (विदेश मंत्री) |
| ब्रिटिश प्रतिनिधि | Yvette Cooper (विदेश मंत्री) |
| प्रमुख मुद्दा | Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा |
| आर्थिक नुकसान | तेल रिफाइनिंग क्षमता में 40% तक की कमी |
ब्रिटेन और कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने अमेरिका की रणनीति पर थोड़ी असहमति भी जताई है। कुछ सहयोगियों का मानना है कि इस युद्ध को टाला जा सकता था। बैठक में मानवीय सहायता पहुंचाने और नागरिकों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की अपील भी की गई है। खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले व्यापार पर भी इस तनाव का सीधा असर देखने को मिल रहा है।




