US-Iran News: ईरानी अधिकारियों ने फोन इस्तेमाल करना किया बंद, लोकेशन ट्रैक होने के डर से अमेरिका को संपर्क में हो रही दिक्कत
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों में एक बड़ी बाधा सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने बताया है कि ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क करना अब बहुत मुश्किल हो गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि ईरानी अधिकारी अपनी लोकेशन ट्रैक होने और निशाना बनाए जाने के डर से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं। यह जानकारी हाल ही में आई एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरान-अमेरिका के बीच संवाद की चुनौतियों का जिक्र किया गया है।
ईरानी अधिकारी क्यों कर रहे हैं फोन के इस्तेमाल से परहेज?
ईरानी अधिकारियों के बीच अपनी सुरक्षा को लेकर गहरा डर बैठ गया है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों को अंदेशा है कि फोन का इस्तेमाल करने पर उनके गुप्त ठिकानों का पता चल सकता है और उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। इसी डर की वजह से वे डिजिटल संचार के माध्यमों से दूरी बना रहे हैं।
- ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi और अन्य वरिष्ठ नेता सुरक्षा कारणों से फोन से बच रहे हैं।
- मिडिल ईस्ट के मध्यस्थों के लिए इन अधिकारियों से बात करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
- यह सुरक्षा चिंताओं का मामला तब और गंभीर हो गया जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हुईं।
- अमेरिका का दावा है कि ईरानी पक्ष संवाद के लिए सुरक्षित तरीके तलाश रहा है लेकिन उसमें देरी हो रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का मौजूदा स्टेटस
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 27 मार्च 2026 | अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरानी अधिकारियों द्वारा फोन न इस्तेमाल करने की पुष्टि की। |
| 25 मार्च 2026 | Donald Trump ने ईरान के साथ बातचीत की संभावनाओं पर दोबारा चर्चा शुरू की। |
| 23 मार्च 2026 | ईरानी विदेश मंत्री ने वाशिंगटन के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया। |
| 16 मार्च 2026 | Steve Witkoff और ईरानी अधिकारियों के बीच सीधे संदेश भेजने की खबरें आईं। |
हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान को लेकर विरोधाभासी खबरें आई हैं। एक तरफ अमेरिका का कहना है कि उनके दूत Steve Witkoff ईरानी पक्ष के संपर्क में हैं, वहीं ईरान इन खबरों को अफवाह बताकर खारिज कर रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि वह बातचीत के दरवाजे खुले रखना चाहते हैं, लेकिन परमाणु हथियारों के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। फिलहाल मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए सक्रिय हैं।




