Yemen Houthi Rebels Warning: यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिका और इजरायल को दी बड़ी चेतावनी, कहा- हमारी उंगलियां अब ट्रिगर पर हैं
यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी जारी की है। प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Yahya Saree ने शुक्रवार, 28 मार्च 2026 को एक बयान में कहा कि उनके हाथ अब ट्रिगर पर हैं और वे किसी भी समय सीधा सैन्य हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। उन्होंने साफ किया कि यमन अपनी धार्मिक और नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस संघर्ष में कूदने को तैयार है।
हूती विद्रोहियों ने किन शर्तों पर दी हमले की चेतावनी?
ब्रिगेडियर जनरल Yahya Saree ने उन खास परिस्थितियों के बारे में बताया है जिनमें यमन सीधे तौर पर युद्ध में शामिल हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यमन का रुख क्षेत्रीय सुरक्षा और इस्लामिक हितों की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
- अगर ईरान और ‘Axis of Resistance’ (क्षेत्रीय प्रतिरोध समूहों) पर अमेरिकी-इजरायली हमले लगातार जारी रहते हैं।
- अगर मौजूदा संघर्ष में कोई अन्य नया पक्ष शामिल होने की कोशिश करता है।
- अगर ईरान या किसी भी मुस्लिम देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए Red Sea (लाल सागर) का इस्तेमाल किया गया।
- इजरायल की विस्तारवादी नीतियों और उनकी क्षेत्रीय योजनाओं का मुकाबला करने के लिए यमन पीछे नहीं हटेगा।
मध्य पूर्व में ईरान-इजरायल संघर्ष और हालिया घटनाक्रम
शुक्रवार को हूती प्रवक्ता के बयान के साथ ही क्षेत्र में कई बड़ी सैन्य घटनाएं सामने आई हैं। ईरान ने इजरायल के विभिन्न हिस्सों पर मिसाइलें दागी हैं, जिसकी वजह से Jerusalem और Tel Aviv में हवाई हमले के सायरन सुनाई दिए। इसके अलावा, ईरान के Bushehr परमाणु संयंत्र पर पिछले दस दिनों में तीसरी बार हमला किया गया है, हालांकि IAEA की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल किसी रेडिएशन के रिसाव का खतरा नहीं है। सऊदी अरब के एक एयर बेस पर हुए मिसाइल हमले में कुछ अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की भी खबर मिली है।
आम जनता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका क्या असर होगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह तनाव अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है। पिछले एक महीने से जारी इस संघर्ष की वजह से Red Sea के समुद्री मार्ग पर सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है। यमन की इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है। यमन ने साफ कर दिया है कि वे अपनी समुद्री सीमाओं का इस्तेमाल किसी भी मुस्लिम देश के खिलाफ नहीं होने देंगे, जिससे आने वाले दिनों में सैन्य हलचल और बढ़ सकती है।




