West Asia Flight Update: खाड़ी देशों के तनावपूर्ण इलाकों में उड़ानें रोकने की मांग, पायलटों ने सुरक्षा पर जताई चिंता
एयरलाइंस पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA) ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए DGCA से एक बड़ी अपील की है। संगठन ने भारत सरकार और नागरिक उड्डयन निदेशालय से मांग की है कि हाई-रिस्क वाले युद्ध क्षेत्रों में विमानों का संचालन तुरंत बंद किया जाए। पायलटों का कहना है कि इन इलाकों में उड़ान भरना यात्रियों और क्रू की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने पायलटों के लिए वार-रिस्क इंश्योरेंस कवरेज को अनिवार्य करने की भी बात कही है।
किन देशों के हवाई क्षेत्र को लेकर है सबसे ज्यादा खतरा
DGCA ने मार्च 2026 में एक सुरक्षा परामर्श जारी किया था जिसमें भारतीय एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के नौ देशों के ऊपर से उड़ान भरने में सावधानी बरतने या वहां से बचने की सलाह दी थी। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और जवाबी हमलों को देखते हुए लिया गया था। इन देशों की सूची इस प्रकार है:
- बहरीन और ईरान
- इराक और इजराइल
- जॉर्डन और कुवैत
- लेबनान और कतर
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
सऊदी अरब और ओमान के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति तो है, लेकिन वहां भी विमानों को 32,000 फीट से ऊपर रहने के निर्देश दिए गए हैं। पायलटों का तर्क है कि सरकार को खुद इन रूटों पर रोक लगानी चाहिए न कि इसका फैसला एयरलाइन कंपनियों पर छोड़ना चाहिए।
इंश्योरेंस और सुरक्षा पर पायलटों की मुख्य मांगें
ALPA ने 27 और 28 मार्च 2026 को दोबारा अपनी चिंताओं को दोहराया है। उनका कहना है कि एयरलाइन कंपनियों के पास युद्ध के खतरों को भांपने के लिए जरूरी इंटेलिजेंस और निगरानी क्षमता नहीं होती है। पायलटों ने अपनी मांगों में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया है:
- खतरनाक युद्ध क्षेत्रों में व्यावसायिक उड़ानों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाए।
- पायलटों और चालक दल के लिए मान्य वार-रिस्क इंश्योरेंस की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
- बीमा कवरेज का लिखित सत्यापन अनिवार्य रूप से पायलटों को उपलब्ध कराया जाए।
- सुरक्षा के जोखिम का आकलन सरकार के स्तर पर केंद्रीय रूप से किया जाना चाहिए।
पायलट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर इन सुरक्षा चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। उन्होंने पुराने हादसों का हवाला देते हुए कहा है कि युद्ध क्षेत्रों में उड़ान भरना मानवीय जीवन को जानबूझकर खतरे में डालने जैसा है।




