इराक: कुर्दिस्तान राष्ट्रपति के घर पर ड्रोन हमला, ईरान ने आतंकी घटना बताकर अमेरिका पर लगाया आरोप
इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवन बरजानी (Nechirvan Barzani) के आवास पर शनिवार, 29 मार्च 2026 को ड्रोन से हमला किया गया। इस घटना के बाद मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। हमले की जानकारी मिलते ही ईरान, अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने इस हमले को आतंकवाद बताया है और इसके लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि अमेरिका ने इसके लिए ईरान के करीबी संगठनों पर उंगली उठाई है।
हमले को लेकर विभिन्न देशों का क्या रुख है?
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका और इजरायल द्वारा क्षेत्र की शांति भंग करने की एक साजिश है। वहीं, अमेरिका के विदेश विभाग ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह हमला इराक में सक्रिय उन मिलिशिया ग्रुपों ने किया है जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस हमले को अस्वीकार्य बताया और कुर्दिस्तान के नेतृत्व के प्रति अपना समर्थन जताया है।
कुर्दिस्तान सरकार की मांग और मुख्य बिंदु
कुर्दिस्तान के प्रधानमंत्री मसरूर बरजानी ने इस हमले को कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया है। उन्होंने इराक की केंद्र सरकार से अपील की है कि वे इन अपराधियों को पकड़कर सजा दें। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए मदद मांगी है। इस हमले और उससे जुड़ी प्रतिक्रियाओं को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| हमले की तारीख | 29 मार्च 2026, शनिवार |
| निशाना | नेचिरवन बरजानी का आवास |
| ईरान का आरोप | अमेरिका और इजरायल पर हमला करने का शक |
| अमेरिका का आरोप | ईरान समर्थित मिलिशिया पर आरोप |
| कुर्दिस्तान की मांग | अपराधियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई |
क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या होगा असर?
इस हमले के बाद इराक और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। IRGC ने कहा है कि वे अपने क्षेत्रीय साथियों की रक्षा के लिए तैयार हैं और उन्होंने एक साझा सुरक्षा तंत्र बनाने की बात कही है। कुर्दिस्तान सरकार ने साफ किया है कि उन्हें अपने नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए जवाब देने का पूरा अधिकार है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और बड़े देश एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।




