ईरान ने अमेरिका और इजरायल की शर्तें ठुकराई, संसद अध्यक्ष बोले जीत तक जारी रहेगी जंग
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहा तनाव अब और अधिक बढ़ गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलीबाफ ने साफ कर दिया है कि उनका देश किसी भी हाल में सरेंडर नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान तब तक अपनी लड़ाई जारी रखेगा जब तक वह पूरी तरह अपनी शक्ति स्थापित नहीं कर लेता। IRNA न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका द्वारा दी गई शर्तों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और अपनी सेना को किसी भी जमीनी हमले का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा है।
ईरान ने क्यों ठुकराया शांति का प्रस्ताव?
ईरान के संसद अध्यक्ष का कहना है कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से बातचीत का संकेत दे रहा है, लेकिन अंदरूनी तौर पर वह ईरान में जमीनी हमले की योजना बना रहा है। अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए 15 सूत्रीय मांगों की एक सूची दी थी, जिसे ईरानी विदेश मंत्रालय ने अनुचित बताया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी अपनी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं।
| ईरान की मुख्य शर्तें | ताज़ा स्थिति |
|---|---|
| सैन्य अभियान का अंत | इजरायल और अमेरिका के हमले तुरंत रुकने चाहिए |
| युद्ध का हर्जाना | ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई मांगी है |
| स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज | इस समुद्री रास्ते पर ईरान का पूरा संप्रभु अधिकार हो |
| क्षेत्रीय युद्धविराम | पूरे क्षेत्र में एक साथ शांति लागू की जाए |
क्षेत्र में क्या हैं ताजा सैन्य और कूटनीतिक हालात?
मिडल ईस्ट में युद्ध की स्थिति 28 फरवरी 2026 से ही गंभीर बनी हुई है। 27 मार्च को अमेरिकी नौसेना का बड़ा जहाज USS Tripoli लगभग 3,500 सैनिकों के साथ क्षेत्र में पहुंच चुका है। दूसरी तरफ, तेहरान में रविवार की सुबह दो धमाकों की खबरें भी आई हैं जिससे तनाव और बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिलहाल ईरान ने दुश्मन देशों के जहाजों के लिए बंद कर रखा है।
- इस्लामाबाद बैठक: 30 मार्च को पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री इस संकट पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान में मिलेंगे।
- शिपिंग में राहत: ईरान ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 व्यापारिक जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है।
- जनता का समर्थन: गलीबाफ ने दावा किया है कि ईरान की 9 करोड़ की आबादी इस मुश्किल समय में सरकार के साथ खड़ी है।
- सहयोगी संगठन: हिजबुल्ला और हूती जैसे गुटों को ईरान ने अपने संघर्ष का अहम हिस्सा बताया है।




