Israel New Law: कुवैत ने फलस्तीनी कैदियों को फांसी देने वाले इज़रायली कानून की कड़ी निंदा की, UN में उठाया मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र में कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत Al-Hayen ने इज़रायल द्वारा पारित एक नए कानून की कड़ी निंदा की है। इस कानून के तहत फलस्तीनी कैदियों को फांसी देने का रास्ता साफ हो गया है। कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) के अनुसार, कुवैत ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है और अपनी आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई है। इज़रायली संसद यानी Knesset ने भारी हंगामे के बीच इस कानून को मंजूरी दी थी, जिसमें फलस्तीनी कैदियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।
इज़रायल के इस नए फांसी वाले कानून में क्या नियम बनाए गए हैं?
यह कानून मुख्य रूप से उन फलस्तीनी निवासियों पर लागू होगा जो इज़रायली नियंत्रण वाले इलाकों में रहते हैं। इज़रायली संसद में इस कानून को 62 वोटों के साथ पास किया गया था। इस कानून में सजा और अदालती प्रक्रिया को लेकर कुछ कड़े नियम तय किए गए हैं जिन्हें नीचे देखा जा सकता है:
| नियम | विवरण |
|---|---|
| सजा का तरीका | दोषी पाए जाने पर दोषी को फांसी पर लटकाया जाएगा। |
| समय सीमा | अदालत के अंतिम फैसले के 90 दिनों के भीतर सजा पूरी करनी होगी। |
| अदालती फैसला | सजा सुनाने के लिए जजों की सर्वसम्मति जरूरी नहीं है, केवल साधारण बहुमत से फैसला हो सकेगा। |
| सैन्य अदालत | वेस्ट बैंक की सैन्य अदालतों को भी मौत की सजा देने का अधिकार दिया गया है। |
| कैदियों के अधिकार | फांसी की सजा पाने वाले कैदियों को अकेले रखा जाएगा और वकीलों से केवल वीडियो कॉल पर बात हो पाएगी। |
दुनिया भर के संगठनों और देशों ने इस कानून पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने इस कानून को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि यह निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी का उल्लंघन करता है। फलस्तीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह कानून नरसंहार को कानूनी रूप देने की एक खतरनाक कोशिश है। कुवैत के साथ-साथ मिस्र और जॉर्डन ने भी इसे नस्लवादी और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करार दिया है।
वर्तमान में इज़रायल का सुप्रीम कोर्ट इस कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं की समीक्षा कर रहा है। अदालत ने इज़रायली सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 24 मई 2026 तक का समय दिया है। मानवाधिकार संगठन Adalah ने पुष्टि की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस कानून को लागू नहीं किया जाएगा। इस कानून के पारित होने के बाद वेस्ट बैंक के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।




