Saudi Arabia New Update: जेद्दा पोर्ट पर अब नहीं लगेगा लंबा जाम, गेटों की संख्या 10 से बढ़ाकर 18 की गई
सऊदी अरब ने अपने व्यापारिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जेद्दा इस्लामिक पोर्ट (Jeddah Islamic Port) में बड़ा सुधार किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पोर्ट के गेटों की क्षमता को 10 से बढ़ाकर अब 18 ट्रैक कर दिया गया है। यह फैसला आयात, निर्यात और ट्रांजिट कंटेनरों की आवाजाही को और भी तेज़ बनाने के लिए लिया गया है। इससे पोर्ट पर आने वाले सामान की हैंडलिंग में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
जेद्दा पोर्ट में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं?
जेद्दा पोर्ट के आधुनिकिकरण के लिए सरकार और निजी कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं। इस विस्तार योजना के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं जो व्यापार की गति को बढ़ाएंगे।
- पोर्ट के प्रवेश और निकास द्वारों की संख्या 10 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है।
- DP World ने यहां तीन नए अत्याधुनिक क्रेन लगाए हैं जिससे कुल क्रेनों की संख्या 17 हो गई है।
- पोर्ट की कंटेनर क्षमता को 1.8 मिलियन से बढ़ाकर 4 मिलियन TEUs कर दिया गया है।
- भविष्य में इस क्षमता को 5 मिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
- पोर्ट के उत्तरी हिस्से के क्षेत्रफल को 7 लाख से बढ़ाकर 15 लाख वर्ग मीटर किया गया है।
- पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कार्बन उत्सर्जन को 50 प्रतिशत तक कम करने की योजना है।
व्यापारियों और आम जनता को क्या सुविधा मिलेगी?
पोर्ट की क्षमता बढ़ने का सीधा असर सामान की कीमतों और उपलब्धता पर पड़ता है। नई तकनीकों के इस्तेमाल से अब पोर्ट पर काम करना पहले से ज्यादा आसान और तेज हो गया है।
| सुविधा का नाम | नया अपडेट |
|---|---|
| गेट ट्रांजैक्शन समय | 2 मिनट से घटकर सिर्फ 10 सेकंड हुआ |
| नई शिपिंग सर्विस | MAERSK द्वारा चीन और कोरिया के लिए AE19 सेवा शुरू | AI और IoT आधारित सामान ट्रैकिंग सिस्टम लागू |
| आधुनिकीकरण बजट | कुल 800 मिलियन डॉलर का निवेश कार्यक्रम |
| पर्यावरण सुरक्षा | इलेक्ट्रिक क्रेन और वाटर रिसाइकिलिंग सिस्टम का उपयोग |
जेद्दा पोर्ट लाल सागर पर सऊदी अरब का सबसे बड़ा पोर्ट है जिसकी सालाना क्षमता 130 मिलियन टन है। नए गेटों के खुलने और ऑटोमेशन बढ़ने से उन भारतीय व्यापारियों और प्रवासियों को भी फायदा होगा जो खाड़ी देशों के बीच सामान की आवाजाही का काम करते हैं। इससे सप्लाई चेन अधिक लचीली बनेगी और रेड सी के रास्ते होने वाले व्यापार में रुकावटें कम होंगी।




