ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से साफ इनकार, कहा- हमारे बीच अब भरोसे का लेवल है जीरो
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की औपचारिक बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का अमेरिका पर भरोसा अब जीरो हो चुका है क्योंकि पिछले समझौतों का अनुभव बहुत खराब रहा है। हालांकि क्षेत्रीय देशों और दूतों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन ईरान इसे आधिकारिक बातचीत नहीं मान रहा है। इस तनाव का असर खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों पर भी पड़ सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री के बयानों की मुख्य बातें क्या हैं?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि हमने पहले भी अमेरिका के साथ बातचीत की थी लेकिन उसका नतीजा हम पर हमलों के रूप में सामने आया। उन्होंने बताया कि अमेरिका की तरफ से करीब 15 प्रस्ताव मिले थे लेकिन ईरान ने उनमें से किसी का भी जवाब नहीं दिया है। ईरान चाहता है कि केवल युद्ध विराम न हो बल्कि पूरे क्षेत्र में लड़ाई पूरी तरह खत्म हो। इसके अलावा उन्होंने Strait of Hormuz को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है और कहा कि यह केवल मित्र देशों के लिए खुला रहेगा।
क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बड़ी घटनाएं
खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं और तनाव का स्तर बढ़ गया है। पिछले 24 घंटों में हुई मुख्य घटनाओं की जानकारी नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| घटना का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| हवाई हमले | Israel और US ने Tehran सहित कई ठिकानों पर 230 से ज्यादा हमले किए। |
| अमेरिकी सैन्य गतिविधि | ईरान के ऊपर US B-52 बॉम्बर विमानों ने उड़ान भरी है। |
| समुद्री घटना | Dubai के पास एक Kuwaiti तेल टैंकर पर हमला हुआ। |
| सैन्य दावे | IRGC ने Saudi Arabia और UAE में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया। |
| नया नियम | Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने की योजना। |
| शांति प्रयास | Pakistan और China ने युद्ध रोकने के लिए पांच सूत्रीय योजना पेश की। |
ईरान ने चेतावनी दी है कि उनके सशस्त्र बल किसी भी हमले का कड़ा जवाब देंगे। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका को ईरान के साथ सम्मान से बात करनी चाहिए क्योंकि ईरानी लोगों को डराया नहीं जा सकता। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासी इन स्थितियों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि तेल टैंकरों पर हमलों से व्यापार और यात्रा प्रभावित होने का डर बढ़ गया है।




