दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमलों से पानी का नेटवर्क तबाह, बुनियादी ढांचे को पहुँचा भारी नुकसान.
दक्षिण लेबनान में जारी सैन्य तनाव के बीच आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इसराइली हमलों ने दक्षिणी लेबनान में पानी की मुख्य पाइपलाइनों और सप्लाई सिस्टम को भारी नुकसान पहुँचाया है। साउथ लेबनान वॉटर एस्टेब्लिशमेंट ने 3 अप्रैल 2026 को इस तबाही की पुष्टि की है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बुनियादी ढांचे पर हो रहे इन हमलों को लेकर चिंता जाहिर की है।
पानी की सप्लाई और नेटवर्क पर क्या असर पड़ा है?
लेबनान के जल विभाग और ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में पानी और साफ-सफाई के बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया गया है। इससे हज़ारों लोगों के लिए पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है। हमलों के कारण हुए नुकसान का विवरण नीचे दिया गया है:
- दक्षिण लेबनान के 19 में से 6 मुख्य जल केंद्रों को गंभीर क्षति पहुँची है।
- बेका क्षेत्र में महत्वपूर्ण जल स्रोतों को निशाना बनाने से हज़ारों लोग प्रभावित हुए हैं।
- पानी के पंपिंग स्टेशनों और पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन बंद हो गया है।
- बुनियादी ढांचे की मरम्मत में लगी संस्थाओं के काम में बाधा आ रही है।
क्या कहते हैं अंतरराष्ट्रीय नियम और अधिकारी?
मानवीय सहायता संगठन ऑक्सफैम और संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, परिवहन नेटवर्क, बिजली स्टेशन और पानी के सिस्टम को युद्ध के दौरान सुरक्षा मिलनी चाहिए। इस मामले से जुड़ी कुछ प्रमुख जानकारियां इस प्रकार हैं:
| संस्था/अधिकारी | मुख्य बयान और जानकारी |
|---|---|
| ऑक्सफैम लेबनान | इसराइली सेना लेबनान में वही पैटर्न दोहरा रही है जो गाज़ा में देखा गया था। |
| जिनेवा कन्वेंशन | पानी की सप्लाई और जीवन के लिए ज़रूरी चीज़ों पर हमला करना प्रतिबंधित है। |
| इसराइली रक्षा मंत्रालय | IDF लिटानी नदी तक सुरक्षा नियंत्रण बनाए रखेगी और सीमाई गांवों में निर्माण गिराए जाएंगे। |
| संयुक्त राष्ट्र (UN) | नागरिक बुनियादी ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत सुरक्षित होना चाहिए। |
लेबनान में काम कर रहे विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की कमी से आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसराइली अधिकारियों ने कहा है कि उनका लक्ष्य हिजबुल्लाह के ठिकानों को खत्म करना है और इसके लिए वे सीमावर्ती गांवों में सुरक्षा क्षेत्र बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। फिलहाल, 6 लाख से ज्यादा विस्थापितों को वापस लौटने की अनुमति नहीं दी गई है।




