ईरान का तेल टैंकर गुजरात आने के बजाय चीन की तरफ मुड़ा, पेमेंट की शर्तों ने बिगाड़ा भारत का खेल.
ईरान से कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा एक बड़ा जहाज गुजरात पहुंचने से ठीक पहले रास्ता बदलकर चीन की तरफ चला गया है। पिंग शुन (Ping Shun) नाम का यह टैंकर 3 अप्रैल 2026 को भारतीय तट के करीब पहुंच चुका था, लेकिन पेमेंट से जुड़े विवाद के बाद इसे चीन के डोंगयिंग बंदरगाह की तरफ मोड़ दिया गया। अगर यह तेल भारत आता, तो पिछले करीब सात सालों में ईरान से होने वाली यह पहली डिलीवरी होती।
आखिर क्यों बीच रास्ते में बदला गया तेल के जहाज का रास्ता?
शिप-ट्रैकिंग फर्म Kpler की रिपोर्ट के अनुसार, पिंग शुन टैंकर पर करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था। यह जहाज ईरान के खार्ग द्वीप से मार्च की शुरुआत में निकला था और इसे गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पर रुकना था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरानी विक्रेताओं ने पेमेंट के नियमों को अब काफी कड़ा कर दिया है। पहले जहां तेल की खरीदारी पर 30 से 60 दिनों की उधारी मिलती थी, अब वे तुरंत पैसे की मांग कर रहे हैं। बैंकिंग सिस्टम और पैसे भेजने के तरीकों में आ रही समस्याओं की वजह से यह सौदा पूरा नहीं हो सका।
पेमेंट और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी कुछ मुख्य जानकारी
- जहाज का नाम: पिंग शुन (Ping Shun), यह एक अफ्रामैक्स टैंकर है।
- लोडिंग का समय: इसे 4 मार्च 2026 के आसपास ईरान से लोड किया गया था।
- बदला हुआ रास्ता: यह जहाज अब चीन के शेडोंग प्रांत के डोंगयिंग पोर्ट पर जा रहा है।
- पुराना इतिहास: भारत ने साल 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान से तेल लेना बंद किया था।
- वजह: मुख्य कारण पेमेंट की शर्तें और ईरान का ग्लोबल बैंकिंग नेटवर्क SWIFT से बाहर होना है।
सौदा रद्द होने से भारत की तेल आयात योजनाओं पर असर
भारत सरकार का कहना है कि ईरान से तेल की खरीद पूरी तरह से व्यापारिक फायदों और शर्तों पर निर्भर करती है। हालांकि अमेरिका ने मार्च 2026 में कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील दी थी, लेकिन पेमेंट और शिपिंग इंश्योरेंस जैसी मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं। गुजरात का वाडिनार पोर्ट इस तेल का इंतजार कर रहा था क्योंकि वहां की रिफाइनरी के लिए यह कार्गो बुक था। जानकारों के मुताबिक, ईरान से होने वाले व्यापार में इस तरह के बदलाव पहले भी देखे गए हैं, लेकिन भारत के लिए यह एक बड़ा मौका था जो फिलहाल हाथ से निकल गया है।




