मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच चीन और रूस की बड़ी बैठक, समुद्री जहाजों की सुरक्षा और सीजफायर पर बनी सहमति.
चीन और रूस के विदेश मंत्रियों ने मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालात पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की है. 5 अप्रैल, 2026 को हुई इस फोन कॉल में चीनी विदेश मंत्री Wang Yi और रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने माना कि क्षेत्र में शांति के लिए अब कड़े कदम उठाने की जरूरत है. दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल सैन्य कार्रवाई रोककर और बातचीत के जरिए ही इन झगड़ों को सुलझाया जा सकता है.
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किन बड़े मुद्दों पर हुई दोनों देशों के बीच सहमति?
रूस और चीन ने Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को सबसे जरूरी बताया है. दोनों देशों का मानना है कि समुद्र में सुरक्षा तभी मुमकिन है जब जल्द से जल्द युद्धविराम लागू हो जाए. इस चर्चा में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर बात हुई:
- Strait of Hormuz: समुद्री रास्तों को व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना प्राथमिकता है.
- तत्काल युद्धविराम: सैन्य ऑपरेशन्स को तुरंत रोककर राजनीतिक समाधान ढूंढना.
- ईरान का मुद्दा: रूस ने अमेरिका से ‘अल्टीमेटम’ वाली भाषा छोड़ने को कहा है.
- UNSC की भूमिका: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को इस मामले में निष्पक्ष और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
UN Security Council में चीन और रूस का अगला कदम
बहरीन की तरफ से समुद्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक प्रस्ताव लाया जा रहा है, जिस पर UN में वोटिंग होनी है. चीन और रूस ने फैसला किया है कि वे इस पर मिलकर काम करेंगे और दुनिया के सामने एक संतुलित नजरिया रखेंगे. उनका मकसद मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करना है ताकि दुनिया भर के व्यापार और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. चीन ने साफ किया है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए रूस के साथ सहयोग जारी रखेगा.
बातचीत से जुड़ी मुख्य जानकारी:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| तारीख | 5 अप्रैल, 2026 |
| प्रमुख नेता | Wang Yi और Sergey Lavrov |
| मुख्य फोकस | मिडिल ईस्ट और समुद्री सुरक्षा |
| संगठन | UN Security Council |




