ईरान और अमेरिका के बीच शांति की नई कोशिश, 11 अप्रैल से इस्लामाबाद में शुरू होगी सीधी बातचीत
पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति देखने को मिली है। ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपना 10 सूत्रीय शांति प्लान पेश किया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए एक सही आधार माना है। दोनों देशों के बीच अब 11 अप्रैल 2026 से पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सीधी बातचीत शुरू होने जा रही है, जो अगले दो हफ्तों तक चलेगी।
ईरान के 10 सूत्रीय शांति प्लान की प्रमुख शर्तें क्या हैं?
ईरान ने अपने इस शांति प्रस्ताव को अपनी ऐतिहासिक जीत बताया है। इसमें सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक मांगों को शामिल किया गया है। इन शर्तों का विवरण नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:
| क्रम संख्या | ईरान की मुख्य शर्तें |
|---|---|
| 1 | अमेरिका की तरफ से ईरान पर हमला न करने की गारंटी। |
| 2 | स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान का नियंत्रण और ट्रांजिट फीस सिस्टम। |
| 3 | यूरेनियम संवर्धन (Enrich enrichment) के अधिकार को मान्यता। |
| 4 | ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाना। |
| 5 | UNSC और IAEA के सभी पुराने प्रस्तावों को खत्म करना। |
| 6 | ईरान को हुए नुकसान के लिए हर्जाने का भुगतान। |
| 7 | क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की पूरी तरह वापसी। |
| 8 | इजरायली हवाई हमलों और हिजबुल्लाह के साथ युद्ध सहित सभी मोर्चों पर गोलाबारी बंद करना। |
| 9 | ईरान की शक्ति और वर्चस्व के आधार पर नई क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था। |
| 10 | सभी शर्तें पूरी होने तक युद्ध की समाप्ति नहीं मानी जाएगी। |
सीजफायर और बातचीत को लेकर क्या है ताजा अपडेट?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के दो तरफा सीजफायर का ऐलान किया है और ईरान के प्रस्ताव को बातचीत के लिए व्यावहारिक माना है। इस बातचीत के दौरान ईरान की सेना के साथ तालमेल बनाकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि ईरान ने दो हफ्ते के सैन्य ऑपरेशन रोकने और सुरक्षित मार्ग देने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक को जरूरत पड़ने पर दो हफ्ते से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापारिक नजरिए से इस शांति वार्ता को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे क्षेत्र में स्थिरता आने की उम्मीद है।




