अमेरिका और ईरान की शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान में दो दिन की छुट्टी, इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े नियम लागू.
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी शांति वार्ता होने जा रही है. इस अहम डिप्लोमैटिक मीटिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 9 और 10 अप्रैल, 2026 को स्थानीय अवकाश का ऐलान किया है. प्रशासन का मानना है कि छुट्टियों की वजह से सड़कों पर भीड़ कम रहेगी और सुरक्षा एजेंसियों को अपना काम करने में आसानी होगी. इस बैठक को पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
छुट्टियों के दौरान किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस्लामाबाद और रावलपिंडी के सभी सरकारी दफ्तर और स्कूल-कॉलेज बंद रखे जाएंगे. हालांकि, आम जनता की सुविधा के लिए जरूरी सेवाओं को इस दायरे से बाहर रखा गया है. प्रशासन ने कर्मचारियों को शहर न छोड़ने की सलाह दी है ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सेवाएं ली जा सकें.
- अस्पताल और क्लीनिक खुले रहेंगे.
- पुलिस और सुरक्षा बल पूरी तरह तैनात रहेंगे.
- CDA और MCI जैसी जरूरी सेवाएं चालू रहेंगी.
- रेड ज़ोन और उसके आसपास की सड़कों को बंद कर दिया गया है.
- भारी ट्रैफिक के शहर में घुसने पर गुरुवार से ही रोक लगा दी गई है.
वार्ता में शामिल होने वाले मुख्य चेहरे और उनके दल
इस बातचीत के लिए पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को एक समझौते पर पहुंचने के लिए आमंत्रित किया है. व्हाइट हाउस की तरफ से भी इस बैठक की पुष्टि कर दी गई है. मुख्य प्रतिनिधियों की जानकारी नीचे दी गई है:
| देश | प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व | प्रमुख सदस्य |
|---|---|---|
| USA | Vice President JD Vance | Steve Witkoff, Jared Kushner |
| Iran | Speaker Mohammad Baqar Ghalibaf | Iranian diplomats |
| Pakistan | PM Shehbaz Sharif | Ishaq Dar |
शांति वार्ता की मुख्य शर्तें और वर्तमान स्थिति
अमेरिका और ईरान ने इस बैठक से पहले दो हफ्ते के संघर्ष विराम पर सहमति जताई है. ईरान ने अपनी तरफ से एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए पैसों की रिहाई जैसी मांगें शामिल हैं. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी इस वार्ता में अपनी भागीदारी पक्की कर दी है. हालांकि ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह पूरी सतर्कता के साथ बातचीत में शामिल हो रहा है और किसी भी उल्लंघन का जवाब देने के लिए उनकी सेना तैयार है.





