UAE ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीज़फायर पर मांगी सफाई, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना शर्त खोलने की रखी मांग
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम यानी सीज़फायर समझौते की शर्तों पर स्पष्टता मांगी है। यूएई का कहना है कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि ईरान क्षेत्र में होने वाले सभी हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के खोला जाए। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए यह सुरक्षा बेहद जरूरी है क्योंकि समुद्री मार्गों पर तनाव का सीधा असर सामान की कीमतों और तेल की सप्लाई पर पड़ता है।
यूएई ने समझौते को लेकर क्या महत्वपूर्ण बातें कही हैं?
यूएई के विदेश मंत्रालय ने जोर दिया है कि इस मुद्दे को व्यापक तरीके से सुलझाना जरूरी है। इसमें केवल युद्ध रोकना ही काफी नहीं है, बल्कि ईरान की न्यूक्लियर क्षमता, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन की ताकत पर भी लगाम लगनी चाहिए। यूएई का मानना है कि जब तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में आर्थिक दबाव बना रहेगा। हाल के दिनों में यूएई ने अपनी सुरक्षा के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं क्योंकि सीज़फायर के बावजूद हमले पूरी तरह नहीं रुके हैं।
हालिया घटनाक्रम और क्षेत्र की स्थिति पर एक नज़र
क्षेत्र में तनाव के बीच कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे शांति वार्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होनी थी, लेकिन अब इसमें कई अड़चनें आ रही हैं। नीचे दी गई टेबल से आप पिछले 24 घंटों के मुख्य अपडेट देख सकते हैं:
| तारीख | मुख्य घटना |
|---|---|
| 8 अप्रैल 2026 | अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते के सीज़फायर का ऐलान किया। |
| 9 अप्रैल 2026 | यूएई ने ईरान की ओर से दागे गए 17 बैलिस्टिक मिसाइल और 35 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। |
| 9 अप्रैल 2026 | ईरान ने अमेरिका पर शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर बंद कर दिया। |
| 11 अप्रैल 2026 | भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई का दौरा करेंगे और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा करेंगे। |
भारतीय प्रवासियों और खाड़ी देशों पर इसका क्या असर होगा?
खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध जैसे हालात होने पर उड़ानों और काम-काज पर असर पड़ता है। यूएई ने पहले ही साफ किया है कि वह अपनी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा, लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत जैसे देशों के लिए आर्थिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। फिलहाल सभी की नज़रें इस्लामाबाद में होने वाली अगली प्रस्तावित बातचीत पर टिकी हैं।




