इसराइल से सीधी बातचीत के लिए हिजबुल्लाह ने किया मना, लेबनान में भारी तबाही के बीच युद्ध रुकने के आसार कम.
मिडिल ईस्ट में हालात और भी पेचीदा हो गए हैं. हिजबुल्लाह ने इसराइल के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है. लेबनान के सांसद Ali Fayyad ने स्पष्ट किया कि जब तक इसराइल हमले बंद नहीं करता और अपनी सेना पीछे नहीं हटाता, कोई बात नहीं होगी. इधर इसराइल ने सीधी बातचीत की तैयारी की थी, लेकिन हिजबुल्लाह के ताजा रुख से शांति की उम्मीदें कम होती नजर आ रही हैं.
हिजबुल्लाह ने बातचीत का प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
हिजबुल्लाह के सांसद Ali Fayyad ने 9 अप्रैल 2026 को कहा कि उनका संगठन इसराइल के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा नहीं करेगा. उन्होंने साफ किया कि उनकी पहली शर्त इसराइली सेना की वापसी और हमलों पर पूरी तरह रोक है. हिजबुल्लाह चाहता है कि उनके लोग सुरक्षित अपने गांवों में वापस लौटें. इस बयान के तुरंत बाद हिजबुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर कई रॉकेट दागे जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया. इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बातचीत की पहल की थी, लेकिन अब सेना को फिर से अलर्ट रहने को कहा गया है.
लेबनान में तबाही और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
लेबनान में पिछले कुछ दिनों से जारी हमलों ने भारी नुकसान पहुंचाया है. लेबनान सरकार भी चाहती है कि किसी भी बातचीत से पहले युद्धविराम यानी सीजफायर लागू हो. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर चिंता जताई जा रही है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके सहयोगी हिजबुल्लाह पर हमले नहीं रुके तो वह चुप नहीं बैठेगा. वहीं अमेरिका चाहता है कि दोनों देश वाशिंगटन डी.सी. में बातचीत के लिए मेज पर आएं. नीचे दी गई टेबल में पिछले 24 घंटों के हालात को देखा जा सकता है.
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| 8 अप्रैल को हुई मौतें | 300 से अधिक |
| घायल लोगों की संख्या | 6,092 (मार्च से अब तक) |
| हिजबुल्लाह की मांग | सेना की वापसी और युद्धविराम |
| इसराइल का इरादा | हिजबुल्लाह को निशस्त्र करना |
| अगली संभावित बैठक | वाशिंगटन डी.सी. (अगले हफ्ते) |
आम नागरिकों पर क्या हो रहा है असर?
लेबनान में हालात बहुत खराब हैं और सरकार ने 9 अप्रैल को राष्ट्रीय शोक का दिन घोषित किया है. आम जनता इन हमलों से सबसे ज्यादा परेशान है क्योंकि बेरुत जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी बमबारी हुई है. United Nations ने बार-बार कहा है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है और बातचीत ही आखिरी रास्ता है. फिलहाल लेबनान और इसराइल के बीच सीमा पर तनाव कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है. खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और उड़ानों पर पड़ सकता है.




